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जमींदोज हो सकता है पूरा गांव, दहशत में जी रहे 54 परिवार

Tue, 02 Aug 2016 04:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रुद्रप्रयाग
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अापदा से क्ष‌तिग्रस्त हुए मकान - फोटो : demo
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खतरे का साया ग्रामीणों के सिर से टल नहीं रहा है। दहशत इतनी है कि हल्की सी आहट भी ग्रामीणों को डरा देती है। यह डर लोगों को रतजगा करने पर मजबूर कर ‌रहा है। यह स्थिति है रुद्रप्रयाग जिला स्थित अगस्तयमुनि ब्लाक के तल्ला नागपुर पट्टी का मलाऊं गांव के ग्रामीणों की।
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मलाऊं गांव कभी भी जमींदोज हो सकता है। यहां हो रहे भू-धंसाव से कई आवासीय मकानों के चौक धंस गए हैं। भवनों पर दरारें पड़ चुकी हैं। गांव के सात परिवार अन्यत्र शरण लिए हुए हैं। खतरे को देखते हुए ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं।


ग्राम पंचायत फलासी के मलाऊं गांव में 54 परिवार निवास करते हैं। वर्ष 2014 से भू-धंसाव का दंश झेल रहे गांव में इस साल भी हालात गंभीर हैं। गांव से करीब सौ मीटर नीचे हो रहे भू-धंसाव से आवासीय बस्ती क्षेत्र भी धंस रहा है।
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इससे घरों के चौक दो से चार फिट तक धंस गए हैं। मकानों की बुनियाद हिल चुकी है और भवनों की दरारें बढ्ती जा रही हैं।

ग्रामीण महावीर सिंह, दर्शन सिंह, पदमेंद्र सिंह, रणजीत सिंह, जयपाल सिंह, गिरीश सिंह के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। ये लोग परिवार सहित गांव में ही अन्यत्र शरण लिए हुए हैं।

क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रदीप करासी, ग्राम प्रधान बीना देवी का कहना है कि वर्ष 2014 में शुरू हुआ भू-धंसाव का प्रकोप विकराल हो गया है। तब भू-गर्भीय सर्वेक्षण भी हुआ था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

बीते दस दिनों में खतरा ज्यादा बढ् गया है। भू-धंसाव की यही रफ्तार रही तो कई घर जमींदोज भी हो सकते हैं। ऐसे में गांव को अन्यत्र विस्थापन करने की जरूरत है।

इनका कहना है
मलाऊं गांव की स्थिति नाजुक है। तकनीकी टीम को निरीक्षण के लिए कहा गया है। लगातार हो रहे भूस्खलन से कई घरों के चौंक धंस गए हैं, जिस कारण लोग मकान छोड़ रहे हैं। प्रभावित पांच परिवार अन्यत्र शरण लिए हुए हैं। गांव के 13 परिवारों को विस्थापित किए जाने सहित निरीक्षण को लेकर रिपोर्ट तैयार कर उप जिलाधिकारी सदर को सौंप दी गई है।
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- एमएल भेंतवाल
तहसीलदारए रुद्रप्रयाग तहसील
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