इस प्रक्रिया को इससे समझा जा सकता है कि यदि कोई ठग किसी नंबर से एक व्यक्ति को कॉल कर उसे शिकार बनाता है। इसके बाद वह व्यक्ति कुछ देर में ही शिकायत कर देता है तो ठग उस नंबर से फिर किसी और को फोन नहीं कर सकता है। ऐसा जल्दी जल्दी होने पर फर्जी नंबरों पर भी लगाम लग सकेगा। इसी तरह बैंक खाते भी जब लगातार फ्रीज होंगे तो ठगों के नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है।
चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर कार्रवाई में भी चौथा नंबर
चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में कार्रवाई करने के मामले में भी उत्तराखंड पुलिस का चौथा स्थान है। अब तक टिप लाइन यानी सरकारी पोर्टल से मिली जानकारियों के बाद एसटीएफ व साइबर थाने ने 50 से अधिक मामलों में जांच की है। इनमें से 34 मुकदमे आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। यह मुकदमा आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया जाता है। इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और 10 लाख रुपये जुर्माना तक का प्रावधान है।
गृह मंत्रालय की ओर से साइबर सेफ नाम से पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस पर अभी ऑफलाइन जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही है। इस पोर्टल के माध्यम से ठगों के मोबाइल नंबरों को ब्लॉक किया जा सकेगा। इसका एक्सेस सभी थाना पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के पास रहेगा। इससे निश्चित रूप से ठगी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
-अजय सिंह, एसएसपी एसटीएफ