पांच साल के आंकड़े
| साल |
शिकायतें |
ठगी की रक |
बचाई गई रकम |
| 2021 |
4492 |
15 करोड़ |
1.21 करोड़ |
| 2022 |
11169 |
40 करोड़ |
2.45 करोड़ |
| 2023 |
18020 |
69 करोड़ |
7.41 करोड़ |
| 2024 |
23801 |
167 करोड़ |
30.17 करोड़ |
| 2025 |
31870 |
177.81 करोड़ |
28.59 करोड़ |
पिछले साल इन तरीकों से हुई ठगी
| ऑनलाइन ट्रेडिंग |
60 |
| डिजिटल अरेस्ट |
18 |
| ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग |
01 |
| वर्क फ्रॉम होम |
04 |
| इंश्योरेंस पॉलिसी |
01 |
| लोन फ्रॉड |
00 |
| कस्टमर केयर फ्रॉड |
00 |
| सोशल मीडिया गिफ्ट स्कैम |
02 |
| नौकरी लगवाने के नाम पर |
01 |
| केबीसी लॉटरी |
00 |
| फेक वेबसाइट फ्रॉड |
01 |
| ओएलएक्स फ्रॉड |
00 |
| फर्जी फर्म |
01 |
| फर्जी कॉल सेंटर |
01 |
| फेक कॉल/एसएमएस |
06 |
| वेबसाइट हैक |
01 |
| अन्य |
04 |
लगातार जनजागरूकता अभियान सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से चलाया जाता है। लोगों की रकम बचाने के लिए भी पुलिस त्वरित कार्रवाई करती है। यही कारण है कि पिछले साल 28 करोड़ रुपये से अधिक बचाए भी जा चुके हैं। पुलिस भविष्य में संसाधनों को बढ़ाने जा रही है।
- नवनीत भुल्लर, एसएसपी, एसटीएफ