रिपोर्ट के अनुसार, 2012 से 2017 के चुनावों में उत्तराखंड में दागी प्रत्याशियों की संख्या दोगुनी हो गई। 2012 के विधानसभा में 28 दागी प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। 2017 के विधानसभा चुनाव में यह संख्या बढ़कर 54 हो गई।
हालांकि यूपी, बिहार, पंजाब समेत अन्य प्रदेशों की तुलना में उत्तराखंड के विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामले बहुत गंभीर प्रकृति वाले नहीं हैं। न ही किसी भी मामले में किसी सक्षम न्यायालय से अपराध सिद्ध हो पाया है।
कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय पर सबसे ज्यादा मुकदमे
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 की विधानसभा में 22 दागी विधायकों में सबसे अधिक मुकदमे भाजपा के गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय पर हैं। इनमें तोडफोड करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी कार्य में बाधा डालने के अलावा मर्डर का मुकदमा भी शामिल है।
22 में से 17 विधायक भाजपा के
2017 के चुनाव में जिन 22 विधायकों पर आपराधिक केस दर्ज हैं, उनमें 17 विधायक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं।
तीन व अधिक आपराधिक केस वाले विधायक : अरविंद पांडेय, देशराज कर्णवाल, सहदेव सिंह पुंडीर, पूरन सिंह फर्त्याल
दो आपराधिक केस वाले विधायक : मदन कौशिक, डॉ. हरक सिंह रावत, गणेश जोशी, प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदीप बतरा
एक आपराधिक केस वाले विधायक : सुबोध उनियाल, आदेश सिंह, धनसिंह नेगी, गोपाल सिंह रावत, मनोज रावत, नवीन चंद्र दुम्का, प्रीतम सिंह, राजकुमार, राजकुमार ठुकराल, विनोद चमोली, बिशन सिंह चुफाल, यतीश्वरानंद व राम सिंह कैड़ा
सोर्स : एडीआर की रिपोर्ट 2017 विस
भाजपा राजनीतिक के अपराधीकरण के बिल्कुल खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। राजनीतिक शुचिता हमारी पार्टी के एजेंडे में सबसे ऊपर है। पार्टी खुद चाहती है कि अपराधी राजनीति में न आएं।
- डॉ. देवेंद्र भसीन, प्रदेश मीडिया प्रमुख, भाजपा