मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में दलाली के खेल में उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी यूपी और हरियाणा तक पूरा सिंडीकेट काम कर रहा है। कालेजों में दाखिले के इस बैक डोर मार्केट में दलालों की पूरी चेन इन राज्यों में काम कर रही है। सुधा पटवाल इस चेन की छोटी कड़ी है। माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर जांच की जाए, तो कई सफेदपोश इस खेल में सामने आ सकते हैं।
पढ़े, युद्घवीर मर्डर मिस्ट्रीः कहीं उलझ न जाए 'पुलिस'
सूत्र बताते हैं कि एडमीशन के खेल में शामिल दलाल एक-दूसरे से लगातार संपर्क में रहते हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों में वे दो से तीन साल तक की सीटों की बुकिंग पहले ही करा लेते हैं। इसके बाद कमीशन लेकर सीटें एक-दूसरे को बेच दी जाती हैं। सिंडीकेट मजबूत हो, इसके लिए दलालों को कालेजों में मजबूत दखल बनानी होती है। इस काम में वे लोग जल्दी कामयाब हो जाते हैं, जिनके साथ सियासी रसूख भी जुड़ा हो। सुधा भी नेताओं के नाम का सहारा लेकर ही कामयाब हुई थी।
एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि पुलिस एडमीशन में दलाली के इस नेक्सस को तोड़ेगी। बताया कि मामले में कई और लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी जांच की जा रही है।
खुलेंगी पुरानी फाइलें
हत्या की जांच के साथ ही पुलिस सुधा के पुराने कारनामों की भी फाइल खोलने जा रही है। बताया जा रहा है कि सुधा के खिलाफ हापुड़, मेरठ और दून के बसंत विहार थाने में धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं। कई लोगों से सुधा ने बड़ी रकम ली थी, जिसे वह लौटा नहीं रही है।
इन लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। एसएसपी के मुताबिक पुलिस जांच में पता चला है कि सुधा ने अपनी एक रिश्तेदार को भी दाखिलों में कमीशन के इस धंधे से जोड़ा था। एसएसपी ने बताया कि जल्द ही उससे भी पूछताछ की जाएगी।
फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें