आरक्षित सीट पर बैठने को लेकर हुए विवाद में तीन युवकों ने एक यात्री को चलती ट्रेन से फेंक दिया।
ट्रैक किनारे घायल को पड़ा देख ग्रामीणों ने उपचार कराया। बाद में सूचना पर पहुंचे परिवार के लोगों ने उसे लखनऊ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
गोरखपुर निवासी राजीव चौरसिया और आशीष शुक्ल दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करते हैं।
दोनों दोस्त 11 अगस्त को उप्र पुलिस में वायरलेस ऑपरेटरों पद की लिखित परीक्षा में शामिल होने लखनऊ आए थे।
रात में ही सरयू यमुना एक्सप्रेस से दोनों ने वापसी का टिकट करा रखा था। बोगी संख्या एच-5 में सीट 39 पर उनका आरक्षण था।
चारबाग स्टेशन पर जब दोनों ट्रेन में चढ़े तो तीन युवक उस पर काबिज थे। टोकने पर तीनों युवक उठकर चले गए।
रात करीब 2:30 पर हरदोई के पास राजीव दरवाजे के पास हाथ धो रहा था, इसी दौरान सीट से हटने वाले युवक पहुंचे और राजीव को चलती ट्रेन से फेंक दिया।
गंभीर रूप से घायल राजीव रात भर ट्रैक के किनारे पड़ा रहा। सुबह आशीष ने राजीव के परिवार को उसके ट्रेन से गुम होने की सूचना दी तो हड़कंप मच गया।
सभी लोग उसकी तलाश में जुट गए। उधर, घायल पड़े युवक को देख ग्रामीणों ने ले जाकर उपचार कराया। हालांकि पुलिस का मामला होने के कारण उसे जिला अस्पताल में भर्ती नहीं कराया।
12 अगस्त की सुबह 10:30 बजे होश आने पर राजीव ने आशीष को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।
बाद में जानकारी होने पर आरपीएफ और जीआरपी ने राजीव को हरदोई के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान पहुंचे परिवार के लोगों ने उसे लखनऊ लाकर निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।