निर्माण कार्य के भुगतान की एवज में रिश्वत मांग रहे एक सहायक अभियंता को विजिलेंस ने रंगेहाथ दबोच लिया। एई ने ठेकेदार के बिल पर हस्ताक्षर के लिए तीस प्रतिशत एडवांस मांगा था।
ऊर्जा निगम के लिए ठेकेदारी करता है
नीरज त्यागी पुत्र हरिराज त्यागी निवासी ग्राम कुंआवाला, हरिद्वार रोड ने विजिलेंस को शिकायत की थी कि वह ऊर्जा निगम के लिए ठेकेदारी करता है। मार्च 2012 में देहरादून के सहस्त्रधारा आईटी पार्क स्थित विद्युत वितरण खंड (ग्रामीण) ने उसकी फर्म से रात्रिकालीन विद्युत संबंधी होने वाली समस्याओं के निराकरण के लिए एक अनुबंध किया था। इस दौरान उसकी फर्म ने लगभग तीन लाख रुपये के काम किए।
कार्यों के आधार पर विभाग के जेई डीपी बडोनी ने दो लाख 98 हजार रुपये का बिल बनाया। बिल पर सहायक अभियंता एसएस भोगल को हस्ताक्षर करने थे, लेकिन उन्होंने इसके लिए तीस प्रतिशत अग्रिम रिश्वत की मांग की। घूस न देने पर भोगल तीन-चार महीने तक भोगल को चक्कर कटाते रहे। तंग आकर ठेकेदार नीरज त्यागी ने विजिलेंस से शिकायत की।
दस हजार की नोट दिए
विजिलेंस निरीक्षक एसएस बिष्ट ने जांच की तो प्रथमदृष्ट्या मामला सही निकला। बृहस्पतिवार को विजिलेंस ने त्यागी को रसायन लगे दस हजार रुपये भोगल को देने के लिए दिए। ठेकेदार ने उसके बाद गुरुवार को विजिलेंस ने त्यागी को बतौर रिश्वत देने के लिए रसायन लगे दस हजार की नोट दिए।
जैसे ही ठेकेदार ने एई को नोट दिए, विजिलेंस की टीम ने उसे दबोच लिया। प्रभारी पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्र ने ट्रैप करने वाली टीम को ढाई हजार रुपये पुरस्कार की घोषणा की। जबकि निदेशक सतर्कता एसके भगत ने दस हजार रुपये पुरस्कार दिया।
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें