आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी एवं मुजफ्फरनगर के आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन पर फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए सीबीआई के विशेष जज को 60 लाख रुपये की रिश्वत देने के प्रयास का मामला सामने आया है।
आरोप है कि बिचौलिए के माध्यम से इसकी पेशकश की गई। शुक्रवार को अदालत में सुनवाई के दौरान अदालत ने इसका संज्ञान लेते हुए आरोपी की जमानत निरस्त कर उसे कस्टडी में लेने के आदेश दिए।
वहीं सीबीआई को आरोपी के खिलाफ रिश्वत देने के प्रयास का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आरोपी को दो घंटे कस्टडी में लेने के बाद अदालत ने एक-एक लाख रुपये की जमानत पर रिहा कर दिया।
मुजफ्फरनगर के आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन के खिलाफ देहरादून में सीबीआई की विशेष अदालत में आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है।
आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत पर है अफसर
आरोप है कि दून में अपर आयकर आयुक्त रहते हुए उसने दून, नोएडा सहित विभिन्न शहरों में करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। सीबीआई ने वर्ष 2005 में उसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।
सीबीआई अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से आरोपी की तीन करोड़ 13 लाख की संपत्ति जब्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। अदालत में इस प्रार्थना पत्र का निस्तारण होना था।
आरोप है कि फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए आयकर आयुक्त ने बिचौलिए के माध्यम से सीबीआई के विशेष जज अनुज कुमार संगल को 60 लाख रुपये देने की रिश्वत देने का प्रयास किया। शुक्रवार को सीबीआई अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए सीबीआई को आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए।
आरोपी बोला, वह यहां नहीं था
आरोपी आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन को कस्टडी में लिए जाने के दौरान वह यह कहने लगा कि बृहस्पतिवार को वह यहां नहीं था, उसने यह नहीं किया। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
आरोपी पर चल रहे कई मुकदमे
दून में मुजफ्फरनगर के आयकर आयुक्त श्वेताभ सुमन के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। आय से अधिक संपत्ति के अलावा उनके खिलाफ सीबीआई अदालत में आयकर विभाग की फाइलें चोरी, एनजीओ बनाकर इसमें पैसा जमा करवाना आदि मुकदमे चल रहे हैं।
अब एक और मुकदमा होगा दर्ज
मुजफ्फरनगर के आयकर आयुक्त पर दून में पहले से कई मुकदमे चल रहे हैं, सीबीआई की विशेष अदालत के आदेश पर आरोपी पर अब एक और मुकदमा चलेगा। समझा जा रहा है कि सीबीआई रात ही आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर प्रकरण की जांच शुरू कर सकती है।