देहरादून में इंजीनियरिंग छात्र की संदिग्ध मौत के मामले में अदालत ने संस्थान के डायरेक्टर और चार छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। एक माह पुरानी घटना में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था।
हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वजह साफ न होने पर विसरा सुरक्षित रखा गया था। पीड़ित परिवार ने इसके बाद अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था।
भीमताल के मल्लीताल निवासी कार्तिक प्रेमनगर क्षेत्र के देवभूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (डीबीआईटी) में बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र था। छुट्टी पर गया कार्तिक 26 जनवरी को घर से दून लौटा था।
कार्तिक कॉलेज के हास्टल में रहता था, लेकिन 26 जनवरी को वह हास्टल जाने के बजाय प्रेमनगर में रहने वाले एक दोस्त के कमरे पर चला गया था। वहां पार्टी के बाद देर रात वह सो गया।
27 जनवरी को वह नहीं जगा तो सहपाठी उसे लेकर प्रेमनगर अस्पताल गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पोस्टमार्टम में भी मौत की वजह साफ नहीं र्हुई थी। परिजनों ने हत्या की आशंका जर्ताई थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।
पिता ने लगाए आरोप 'जहर देकर मारा'
बाद में कार्तिक के पिता गिरीश चंद ने दून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव कुमार की अदालत में प्रार्थनापत्र दिया। गिरीश का कहना था कि कॉलेज में एक सीनियर विकास वैरी कार्तिक को प्रताड़ित करता था। वार्डन ने शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। गिरीश ने आशंका जताई कि बेटे को साजिश के तहत खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर मारा गया।
आरोप है कि बेटे की जेब से एटीएम कार्ड और 20 हजार रुपये भी गायब थे। गिरीश ने अदालत को यह भी बताया कि संस्थान डायरेक्टर संजय बंसल ने उन्हें फोन पर कार्तिक को फूड प्वाइजनिंग होने की बात कही थी। वह दून अस्पताल पहुंचे तो बेटे की मौत का पता चला।
अदालत ने मामले को संदिग्ध मानते हुए प्रेमनगर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच का आदेश दिया है। मामले में संस्थान डायरेक्टर बंसल के अलावा बीटेक छात्र राहुल नेगी, आशीष, शिखर और विकास वैरी को आरोपी बनाया गया है।