हरिद्वार में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। हैवान बाप ने अपने बेटे को इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई।
हरिद्वार के श्यामनगर कालोनी निवासी किशोर सूरज की बलि नहीं दी गई थी बल्कि उसके पिता की पिटाई से उसकी मौत हुई। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस बात का दावा किया है।
अब सूरज के पिता कर्मसिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। देर शाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सूरज का शव उसके चाचा और अन्य परिजनों को सौंप दिया गया।
शुक्रवार रात को सूरज (14) का शव पुलिस ने इस शिकायत पर कब्जे में लिया था कि उसकी हत्या बलि के लिए की गई है। उसके पिता को तांत्रिक बताया गया था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और पिता तथा अन्य परिजनों से पूछताछ की। इस दौरान कई तथ्य सामने आए।
सूरज कर्म सिंह की पहली पत्नी का बेटा था। पहली पत्नी की मौत के बाद सूरज की देखभाल के लिए कर्म सिंह ने अपनी साली सुषमा से शादी कर ली थी जिससे उसके तीन बच्चे हैं।
कोतवाल डीएस पंवार ने बताया कि सूरज की मौत शुक्रवार दिन में करीब 12 बजे के आसपास हो गई थी। अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जिस समय सूरज की मौत हुई उससे पहले कर्म सिंह ने सूरज को बुरी तरह से पीटा था जिसके चलते वह सीढ़ियों से गिरकर चोटिल हो गया था।
सलाखों के पीछे बहाता रहा पश्चाताप के आंसू
एसपी देहात प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना और चोट लगना बताया गया है। माना जा रहा है कि मारपीट के दौरान ही संभवत: गला या मुंह दबाने से उसका दम घुट गया और मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पुलिस मृतक के पिता के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में बलि जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।
गुस्से के चलते अपने ही घर के चिराग को बुझा देने के आरोप में सलाखों के पीछे बैठा कर्म सिंह अब पश्चाताप के आंसू बहा रहा है। शनिवार की दोपहर को जब उससे घटना के बारे में जानकारी ली गई तो वह फफक कर रो पड़ा।
उसका कहना था कि उसने बेटे को नहीं मारा है। उसका बेटा पांच दिन से उल्टी दस्त से बीमार था लेकिन गरीबी के चलते वह उसे उचित उपचार नहीं दिला सका। हालांकि उसने यह बात स्वीकारी कि दवा के लिए दिए गए पैसों को खर्च करने पर उसने सूरज के साथ मारपीट की थी। वह पुलिस अधिकारियों के समक्ष भी गिड़गिड़ाता रहा।
तीन शादियां कर चुका है कर्म सिंह
पहली पत्नी की मौत के बाद कर्म सिंह ने बेटे सूरज की देखभाल के लिए दूसरी शादी की थी लेकिन सौतेली मां शायद सूरज को उस उम्मीद से नहीं अपना सकी, जिसकी उम्मीद कर्म सिंह ने की होगी। बात बिगड़ती गई और उसकी दूसरी पत्नी से उसके मतभेद हो गए और वह घर छोड़कर चली गई।
बताया गया कि इसके बाद सूरज अपनी मौसी सुषमा के पास जाकर रोया करता था। वह बार-बार उसे अपने घर आने की बात कहता था। अपनी बहन के पुत्र की देखभाल के लिए सुषमा ने कर्मसिंह के साथ शादी की हामी भरी थी। कर्म सिंह भी बेटे के लिए अपनी साली को तीसरी पत्नी के रूप घर ले आया लेकिन उसके परिवार के लोग इससे खुश नहीं थे। सुषमा और कर्म सिंह के तीन बच्चे हैं।
सुषमा की मानें तो वह सूरज को अपने सगे बेटे की तरह ही प्यार करती थी। अपने पति की नशे की आदत से खिन्न सुषमा भी बिलखते हुए यह कहती रही कि मैने तो अपने जीजा से शादी केवल सूरज के लिए ही की थी लेकिन वह ही उसे छोड़कर चला गया।
अपनों ने बना ली हैवान से दूरी
कर्म सिंह की मां मूर्ति देवी और भाई सुनहरा गांव में रहते हैं। पुलिस से उन्हें सूरज की मौत की खबर मिली लेकिन इसके बावजूद वह न कर्म सिंह के घर गए और न ही कोतवाली पहुंचकर उससे मिलना गंवारा समझा।
हालांकि यह बात पुलिस को बताई गई कि जिस समय सूरज की मौत हुई उस समय उसकी दादी दशहरा मनाने के लिए कर्म सिंह के घर आई थी लेकिन शनिवार को जब पुलिस ने पूछताछ की तो सभी परिजनों ने यह कहते हुए हाथ खींच लिए कि उनके चार साल से कर्म सिंह से कोई संबंध नहीं थे।
उन्होंने पुलिस से बात करने तक से इंकार कर दिया। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद जब कोई शव लेने नहीं आया तो पुलिस ने कर्म सिंह के भाइयों को ही अंतिम संस्कार के लिए सूरज का शव सौंप दिया।
बहुत मेहनती था सूरज
पुलिस जब शनिवार दोपहर पूछताछ के लिए कर्म सिंह के घर गई तो आसपास रहने वाले कई किशोर भी वहां पर पहुंचे। इन बच्चों का कहना था कि न तो सूरज नशा करता था और न ही उसमें कोई और बुराई थी। वह इतना मेहनती था कि सब्जी बेचकर परिवार के पालन में पिता का हाथ बंटाता था। ये बच्चे सूरज के बारे में कुछ गलत सुनने के लिए तैयार नहीं थे।