बीएएमएस और बीएचएमएस के दाखिलों के लिए आयोजित हुए उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट(यूएपीएमटी) में असल अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते आठ मुन्नाभाई पकड़े गए।
गिरोह के कोआर्डिनेटर को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि मास्टरमाइंड फ रार हो गया। पकड़े गए आरोपी यूपी और बिहार के रहने वाले हैं। देर शाम तक पुलिस पूछताछ और रैकेट में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने में जुटी थी। परीक्षा आयोजक उत्तराखंड आयुर्वेद विवि इन सभी परीक्षार्थियों का रिजल्ट रोकने के अलावा परीक्षा निरस्त भी कर सकता है।
रविवार को यूएपीएमटी के लिए यूपी और बिहार से छात्रों का पूरा दल दून पहुंचा था। एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि उन्हें एक गोपनीय पत्र मिला था, जिसके आधार पर आठ टीमें गठित कर कार्रवाई शुरू की गई थी। परीक्षा दून में चार केंद्रों पर हुई।
परीक्षा शुरू होते ही केंद्रों में पुलिस ने एक के बाद एक सभी अभ्यर्थियों की चेकिंग शुरू कर दी। इससे अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया। तीनों परीक्षा केंद्रों से पुलिस ने अमित(बिहार), बसंत (बुलंदशहर), गुड्डू (हरिद्वार) और सलीम (बरेली) को गिरफ्तार किया। इनके पास जो प्रवेश पत्र था, उसमें सारी डिटेल तो असली अभ्यर्थी की थी, लेकिन पासपोर्ट साइज फ ोटो मुन्नाभाइयों का लगा था।
शहर कोतवाली में इनसे पूछताछ के बाद गिरोह के कोआर्डिनेटर के अलावा चार और मुन्नाभाइयों को पकड़ा गया। कोआडिनेटर ने ही इन सभी की दून में रहने, खाने के अलावा रुपये की व्यवस्था की थी। एसएसपी सदानंद दाते ने बताया जो पत्र मिला था कि उसमें 18 लोगों की सूचना है।
ऐसे में पुलिस सभी पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है। दूसरी ओर, आयुर्वेद विवि के कुलसचिव डा. मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि उन्हें पहले ही 13 संदिग्धों की सूचना मिली थी, जिसके बारे में पुलिस को बता दिया गया था। उन्होंने बताया कि सभी संदिग्धों का रिजल्ट रोकने से लेकर उनकी परीक्षा रद्द तक की जा सकती है।
बड़ा गिरोह कर रहा था काम
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह कोई बड़ा गिरोह है, जिसमें तमाम नामी कोचिंग संस्थानों से लेकर कई और संबंधित अधिकारी भी मिले हुए हो सकते हैं। पुलिस की टीम अभी हरिद्वार, मंगलौर और रुड़की में छापेमारी कर रही है। एसएसपी ने बताया कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया जाएगा।
एक परीक्षा के 20 हजार का लालच
पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया है कि उनसे प्रहलाद नामक व्यक्ति ने संपर्क किया था। उसने अलग-अलग पांच हजार से 20 हजार रुपये तक का लालच देकर परीक्षा के लिए बुलाया था। एसएसपी डा. सदानंद दाते के मुताबिक गिरोह के संचालक ने गरीब मेधावियों को अपने जाल में फंसाकर यहां तक बुलाया है।
खुद नाकाम हुआ तो दूसरों को बनाने चला डॉक्टर
पुलिस की छापेमारी में पकड़े गए मुन्नाभाई सिवान, बिहार निवासी संजय कुमार सिंह ने बताया कि वह दस बार एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा दे चुका है, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। खुद भले ही नाकाम रहा हो, लेकिन अब वह पैसे लेकर किसी और को पास कराने के लिए परीक्षा देने आया था।