एक पिता यह कभी नहीं चाहेगा कि उसके हाथ अपने बेटे के खून से रंगे जाएं। लेकिन, बचपन से ही शैंकी के मुकदमों और बुरी आदतों के चलते सिर पर कर्ज होने और जमीन बिकने से परिवार पूरी तरह टूट चुका था। मजबूरी में पिता को अपने हाथों से शैंकी को मौत की नींद सुलाना पड़ा।
दरियापुर निवासी शैंकी पहली बार नाबालिग रहते रुपयों के लेनदेन को लेकर हुई एक बच्चे की हत्या में जेल गया। इसके बाद उसने रुड़की में एक प्रेमी जोड़े को फर्जी तौर पर पुलिसकर्मी बनकर पकड़ा और लड़की के साथ दुराचार भी किया।
इसके बाद आए दिन के झगड़े फसाद के कारण परिवार शैंकी से आजिज आ चुका था। परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं होने के कारण लगातार मुकदमों और समझौतों में रुपया खर्च हो रहा था।