दुराचार और गर्भपात के दोषी पुलिस कांस्टेबल को अदालत ने दस-दस साल की कैद और 41500 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों सजा साथ चलेंगी।
15 साल की उम्र में पिता ने बेचा
वर्ष 2009 में एक महिला ने मूलत: टिहरी के तल्ली बागी, भागीरथीपुरम निवासी और तब दून पुलिस लाइन में तैनात कांस्टेबल राजेंद्र सिंह के खिलाफ दुराचार, गर्भपात और मारपीट का केस दर्ज कराया था। महिला ने बताया था कि उसके पिता ने 15 साल की उम्र में उसे उत्तरकाशी के एक व्यक्ति को बेच दिया था। लेकिन बच्चे न होने पर उस व्यक्ति ने उसे छोड़ दिया।
इसके बाद वह टिहरी में अकेली रह रही थी। वर्ष 2007 में उसकी मुलाकात राजेंद्र सिंह से हुई, जिसने शादी का झांसा दिया और उसे दून ले आया। यहां दोनों किराये पर रहने लगे। आरोप था कि ड्यूटी पर जाते वक्त राजेंद्र महिला को कमरे में बंद कर जाता था।
दो साल तक राजेंद्र उससे दुराचार करता रहा। वह गर्भवती हुई तो शादी के लिए कहने पर राजेंद्र ने मारपीट की, जिससे महिला का गर्भपात हो गया। अदालत ने शुक्रवार को राजेंद्र सिंह को दोषी करार दिया था। इसके बाद पेशी पर आए राजेंद्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
सोमवार को अपर जिला जज द्वितीय नितिन शर्मा की अदालत में अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र सिंह सिंह पुनिया ने पैरवी की। अदालत ने दोषी को दुराचार और गर्भपात में दस-दस साल की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर उसे छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। राजेंद्र सिंह इन दिनों पौड़ी पुलिस लाइन में तैनात था।
पुलिस की जांच पर सवाल
इस मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही। पुलिस कांस्टेबल से जुड़ा मामला होने के कारण महिला की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। शासकीय अधिवक्ता के अनुसार मारपीट से महिला का गर्भपात हुआ, जबकि एक बार उसे मृत बच्चा पैदा हुआ।
विवेचनाधिकारी ने इस बच्चे के डीएनए जांच के लिए सैंपल लेकर कांस्टेबल को दिया था, लेकिन कांस्टेबल ने कथित तौर पर सैंपल खो दिया। इसके बाद दोबारा सैंपल नहीं लिया जा सका। अदालत ने कहा कि पुलिस ने प्रकरण को प्रभावित करने के लिए ही सैंपल खोया था।