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लाडली की लाश देख महिमा की याद आ गई

Wed, 26 Nov 2014 01:50 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, रामनगर
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हल्द्वानी में हुई लाडली की हत्या ने रामनगर की महिमा सेठ हत्याकांड के जख्म हरे कर दिए। ठीक पांच साल पहले नंबर का ही महीना था। छह वर्षीय महिमा शादी समारोह से अचानक लापता हो गई।
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छह दिन बाद खंडहर से उसका अर्द्धनग्न शव बरामद किया गया। और अब लाडली भी शादी समारोह से ही लापता हुई और पांच दिन बाद गौला से उसका अर्द्धनग्न शव बरामद हुआ।

मगर अफसोस, महिमा के कातिल आज भी जिंदा हैं। पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी और फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर फाइल बंद कर दी गई।

महिमा 17 नवंबर2009 को अपनी मां रीना, पिता संजय सेठ और छोटी बहन नूपुर के साथ पैठपड़ाव में शादी समारोह में गई थी। इस बीच वह पानी के स्टॉल से अचानक गायब हो गई। काफी ढूंढखोज के बाद पुलिस को सूचित किया गया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया।
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खाली प्लॉट में मिला था महिमा अर्द्घनग्न शव

कई संगठनों ने एकजुट होकर शहर भर में आंदोलन चलाए, तब पुलिस जागी। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, महिमा तो नहीं मिली, छह दिन बाद भवानीगंज गुलरघट्टी रोड स्थित एक खाली प्लाट में उसका अर्द्धनग्न शव मिला।

महिमा के चाचा राजीव सेठ ने बताया कि महिमा के हत्यारे पकड़े नहीं जा सके। इस केस में पुलिस ने एफआर लगा दी। अब हल्द्वानी में भी इसी तरह का केस होने से महिमा हत्याकांड के जख्म हरे हो गए। बच्चे भी खबर सुनकर डरे-सहमे हैं।

महिमा के सहपाठी 12 वर्षीय हर्ष पांडे का कहना है कि अब शादी-बारात तो छोड़ो बस स्टाप तक भी अकेले जाने पर डर लगता है। महिमा के पिता संजय सेठ से इस घटना का जिक्र किया गया तो उन्होंने कहा कि अब पुरानी बातों को कुरेदने से क्या फायदा।

पुरानी याद आने से जख्म हरे हो जाते हैं। हल्द्वानी की घटना को लेकर सेठ परिवार के पुराने जख्म एक बार फिर हरे हो गए हैं। उनका कहना है कि लाडली के हत्यारों को जरूर फांसी मिलनी चाहिए।
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