सिविल अस्पताल के नवनिर्मित मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में दो दिन में छह बच्चों की मौत के बाद सेहत विभाग की कार्रवाई पर सरकारी डॉक्टर भड़क गए हैं। पीसीएमएस डॉक्टरों ने मंगलवार को अस्पताल में बैठक करके सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
डॉक्टरों ने साफ किया है कि यदि निर्धारित अवधि में सरकार ने डॉ. अलका मित्तल का सस्पेंशन और एसएमओ डॉ. आरके करकरा का तबादला वापस न लिया तो सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर चले जाएंगे।
उन्होंने भी सारे मामले की तह तक जाने के लिए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में गायनी, पीडियाट्रिक, मेडिसिन के डॉक्टर और सर्जन शामिल होंगे।
मरीजों पर लगाए लापरवाही के आरोप
सिविल अस्पताल में तैनात डॉ. अविनाश जिंदल और उनके साथियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि अगर डॉ. अलका और आरके करकरा पर दिए आदेशों को वापस न लिया गया तो शुक्रवार से कोई भी मरीज नहीं देखा जाएगा।
शनिवार को जिला स्तरीय और फिर सभी जिलों में हड़ताल की जाएगी। डॉक्टरों का आरोप है कि सरकार ने शार्टकट इंक्वायरी कर एक्शन लिया है जो गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि लोग पेट में पल रहे बच्चे का चेकअप नहीं करवाते हैं।
लास्ट स्टेज में जब बड़े अस्पताल तक के डॉक्टर आपरेशन से मना कर देते हैं तो वह सिविल अस्पताल में आ जाते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सों, दर्जा चार और सिक्योरिटी के साथ-साथ मानिटर, इक्यूपमेंट और वेंटिलेटर की भी बहुत कमी है। इसके लिए सरकार को कई बार लिखित रूप में भी दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई भी सुनवाई नहीं की गई है।
सेहत मंत्री ने दिखाए कड़े तेवर
नए खुले मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में दो दिन में छह नवजात बच्चों की मौत के बाद सेहत मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने कड़े तेवर अख्तियार कर लिए हैं। ज्याणी ने मंगलवार को सिविल अस्पताल में डॉ. रेणु को नया मेडिकल सुपरिंटेंडेंट नियुक्त कर दिया।
इस संबंध में मंगलवार को ज्याणी ने विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक करके आवश्यक निर्देश जारी किए। साथ ही जिले के सिविल सर्जन को निर्देश दिए गए हैं कि वे अस्पताल के कामकाज की खुद मॉनीटरिंग करें।
ज्याणी ने साफ किया कि विभाग में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने डीसी रजत अग्रवाल को भी जांच रिपोर्ट सात दिन में देने के निर्देश दिए हैं।
नए डॉक्टरों की भर्ती जारी रहेगी
ज्याणी ने कहा कि अस्पताल में नए डॉक्टरों की भरती के लिए प्रक्रिया जारी है। इस मुद्दे को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सामने भी उठाया गया है।
ज्याणी ने कहा कि सभी रिक्त पदों पर नई भरती की जाएगी ताकि मरीजों को बेहतर सेहत सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। उन्होंने हेल्थ डायरेक्टर को भी अस्पतालों के कामकाज सुधारने को कहा। इस अवसर पर विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
एसएमओ को नहीं मिला कोई नोटिस
नवजात बच्चों की मौत के मामले में एसएमओ को भी ट्रांसफर किया गया है। एसएमओ डॉ. आरके करकरा ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि दो डॉक्टरों रेणु और मंदीप को रखा गया है। अब 4 डाक्टर अस्पताल में हो गए हैं। अन्य कमियों को भी पूरा किया जा रहा है।
क्या जल्दी थी विंग खोलने की
सिविल अस्पताल में स्टाफ और अन्य कमियों के बारे में उच्चाधिकारियों को भी कई बार कहा जा चुका है। पहले अस्पताल में कमियां अभी पूरी नहीं की गई और नया जच्चा बच्चा विंग खोल दिया गया। जिसमें 100 बैड लगाए गए और डॉक्टर सिर्फ तीन हैं।
आउटस्टैंडिग अवार्ड से सम्मानित है डॉ. अलका
डॉ. अलका को लगातार अच्छा कार्य करने के लिए मार्च 2012 में आउटस्टेंडिंग परफार्मेंस के लिए अवार्ड दिया जा चुका है। अलका ने कहा कि एक तरफ तो सरकार उन्हें अवार्ड दे रही है और दूसरी तरफ उन्हें सस्पेंड किया जा रहा है। कोई भी उनकी ओर से किए गए काम की प्रशंसा नहीं कर रहा।
नहीं है नर्सरी बैकअप
डॉक्टरों ने कहा कि जब बच्चा पैदा होता है तो उसे नर्सरी बैकअप में भेजा जाता है। अस्पताल में नर्सरी बैकअप न होने के कारण सीएमसी के नर्सरी बैकअप में रेफर किया जाता था। ये ऐलान सरकार ने अपनी कर्मियों को देखते हुए किया था। लेकिन सरकार ने इस डील को भी पिछले दिनों में खत्म कर दिया। अब ऐसे में बिना सुविधा के डाक्टर भी क्या कर सकते हैं।
ट्रांसफर के डर में कर रहे काम
डाक्टरों ने कहा कि इतने लंबे समय से डर कर कार्य कर रहे हैं। सरकार अस्पताल में पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया नहीं करा रही है। अब तक आवाज को इसलिए नहीं उठाया गया क्योंकि नौकरी का डर था। डर था कि कहीं ट्रांसफर दूर न कर दे। आज मजबूर होकर प्रदर्शन पर उतारू होना पड़ा है।