रणवीर एनकाउंटर में सजा पा चुके पुलिसकर्मियों के परिजनों ने अब तत्कालीन अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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परिजनों ने आरोप लगाया है कि रणवीर की हत्या अफसरों की शह पर ही हुई, लेकिन ऊपरी मैनेजमेंट से वे खुद बच गए। जबकि निचले पुलिसकर्मियों को बुला-बुलाकर अनुशासन के नाम पर फंसाया गया।
जानबूझकर उन्हें लिखापढ़ी में शामिल किया गया। पांच साल से पुलिसकर्मियों की रिहाई का इंतजार कर रहे परिजन सीबीआई की विशेष अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अफसरों पर भड़क गए हैं।
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तत्कालीन अफसरों पर खुलकर उठाए सवाल
सोमवार को दिल्ली स्थित कोर्ट परिसर में सिपाही विकास बलूनी के पिता ने खुलकर तत्कालीन अफसरों पर सवाल उठाए थे। अब मंगलवार को दून में सिपाही सौरभ नौटियाल के परिजन सामने आए हैं।
सौरभ की भाभी शोभा नौटियाल और चचेरे भाई हरीश नौटियाल ने कहा कि सौरभ एनकाउंटर के वक्त कहीं और था। अफसरों ने बाद में उसे रायपुर बुलाया और मुकदमे की लिखापढ़ी में उसका नाम शामिल कर दिया।
दोनों ने सवाल उठाया कि अधिकारी कैसे बच गए? क्या वे एनकाउंटर के खेल में शामिल नहीं थे? आरोप लगाया कि सीबीआई ने भी जांच में इन तथ्यों की अनदेखी की।
यही वजह रही कि वाहन चालक को तो आरोपी बना दिया गया, जबकि अफसरों के नाम तक नहीं आए।
बचाव का हर दांव पड़ता गया उल्टा
रणवीर एनकाउंटर की कहानी को सही ठहराने के लिए पुलिस ने एक झूठ बोला तो इसे सही साबित करने के लिए लगातार कई झूठ गढ़े गए।
यहां तक कि पुलिस ने अपने पक्ष में एक विधायक के गनर को भी साजिश का हिस्सा बनाया, लेकिन पुलिस का हर दांव उल्टा पड़ गया। सीबीआई ने जांच शुरू की तो झूठ की पोल खुलती चली गई।
रणवीर एनकाउंटर की जांच सीबीआई ने मोहिनी रोड पर दारोगा जीडी भट्ट से रणवीर और साथियों की मारपीट से ही शुरू की। गवाहों और कंट्रोल रूम की लिखापढ़ी से साफ हो गया कि पुलिस ने रणवीर को मौके से हिरासत में लिया था।
इसके कुछ देर बाद ही उसके एनकाउंटर की सूचना थी। हालांकि, इससे पहले जब रणवीर को पकड़ने की बात उठी थी तो पुलिस ने एक विधायक के गनर को पेश कर बताया था कि मौके से गलती से इस गनर को उठाया गया था।
इसके पक्ष में कई गवाह भी उपलब्ध कराए गए। लेकिन सीबीआई ने बिखरी कड़ियां जोड़कर सच सामने ला दिया।
डरावना सपना थे ये पांच साल...
रणवीर एनकाउंटर ने रणवीर और पुलिसकर्मियों के परिजनों को ही पांच साल तक आशंकाओं में घेरे नहीं रखा, बल्कि 123 ऐसे लोग भी थे जो अनचाहे ही इस मामले से जुड़ गए।
मामले के पक्ष और विपक्ष में ये लोग गवाह बनाए गए थे। लेकिन, इनमें से अधिकतर के लिए बीते पांच साल भयावह सपना बनकर रह गए हैं।
दोषियों को सजा के बाद ये लोग मुकदमेबाजी से पिंड छूटने की राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन अब कोई फिर इस मामले की चर्चा तक नहीं करना चाहता।
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में पुलिस के पक्ष और विपक्ष में गवाह रहे लोगों को खासा दबाव झेलना पड़ा। जिस शख्स ने एनकाउंटर से पहले रणवीर को पकड़े जाने की पुष्टि की थी, उसे तो परिवार समेत दून ही छोड़ना पड़ा।
यह परिवार अब कहां है, कोई नहीं जानता। दूसरी ओर, एक युवक ने पुलिस के पक्ष में पहले मारपीट की बात कही, लेकिन फिर अदालत में इस बयान से मुकर गया था।
उसे भी परेशानी झेलनी पड़ी। सीबीआई ने इस युवक पर ही अलग से जांच बिठा दी थी। इनके अलावा नाई, धोबी, मोहिनी रोड के कुछ दुकानदार समेत कई लोगों को पांच साल तक अदालतों के चक्कर काटने पड़े।
मंगलवार को अमर उजाला ने ऐसे कुछ गवाहों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
बोले, सजा के बाद पूरा सच सामने आ गया है। वैसे भी वे मानसिक तनाव वाले उस दौर को भूल जाना चाहते हैं।