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पुलिस को चकमा दे फरार हुआ जेल से दवा कराने आया कैदी

Sat, 05 Sep 2015 02:00 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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सजायाफ्ता कैदी को दवा दिलवाकर लौट रहे पुलिस कर्मचारियों के उस समय हाथ-पांव फूल गए जब कैदी ऑटो से कूदकर फरार हो गया। सूचना पर पुलिस अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया।
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आननफानन में सूचना फ्लैश करवाकर एसएसपी ने शहर में चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए। आखिरकार एक घंटे की मशक्कत के बाद कैदी को जगजीतपुर चौकी के पास से गिरफ्तार कर लिया। अभिरक्षा में तैनात दोनों पुलिसवालों को निलंबित कर दिया है।

मेला नियंत्रण भवन में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि मूल रूप से बंदरकोटी (टिहरी गढ़वाल) निवासी संजय पुत्र रतन सिंह को दुराचार के दो अलग-अलग मामलों में उच्च एवं स्थानीय न्यायालय ने आठ एवं सात साल की सजा सुनाई थी।
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गढ़वाल रायफल से कोर्ट मार्शल सिपाही संजय को 14 नवंबर 2004 को जेल भेजा गया था और एक मार्च 2005 को उसे जमानत मिल गई थी। लेकिन पांच जनवरी 2006 से वह जेल में ही है। 12 अप्रैल 2007 को टिहरी जेल से उसे हरिद्वार शिफ्ट किया था।

बुखार होने पर जेल से लाया गया था अस्पताल

बुखार होने पर शुक्रवार को कैदी को उपचार के लिए हेड कांस्टेबल प्रोन्नत कमल सिंह एवं दीवान सिंह ऑटो-रिक्शा से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। दोपहर साढ़े 12 बजे के आसपास दवा लेकर लौटते वक्त नगर कोतवाली क्षेत्र के ब्रह्मपुरी क्षेत्र के गुरुद्वारा सिंह सभा के पास से कैदी संजय ऑटो से कूदकर भाग गया।

एसपी सिटी की अगुवाई में पुलिस टीम ने घेराबंदी कर जगजीतपुर चौकी पर चौपहिया वाहन की चेकिंग के दौरान हेड कांस्टेबल प्रोन्नत राजेंद्र प्रसाद, कांस्टेबल संदीप कांबोज, प्रदीप कुमार एवं सुनील राणा ने मेटाडोर से कैदी संजय को दबोच लिया।

आरोपी के खिलाफ हेड कांस्टेबल प्रोन्नत की ओर से अभिरक्षा से भागने के आरोप में नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। इस दौरान एसपी सिटी नवनीत सिंह भुल्लर, सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह, कोतवाली प्रभारी महेंद्र सिंह नेगी मौजूद रहे। एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने कैदी को दबोचने वाले पुलिस टीम को 2500 रुपये नगद इनाम की घोषणा की।
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जेल अधीक्षक ने की पुलिस की राह आसान

जेल से मिले क्लू ने पुलिस की राह आसान की वरना कैदी संजय का गिरफ्त में आना आसान नहीं था। कैदी संजय का मूल पता टिहरी का ही दर्ज है। जेल के रजिस्टर में भी उसका वही पता दर्ज है। लेकिन अब उसका परिवार टिहरी के बंदरकोटी नहीं बल्कि टिहरी से विस्थापित होने पर पथरी क्षेत्र में रह रहा है।

यह जानकारी जेल अधीक्षक एसके सुखीजा की ओर से पुलिस को दी गई। उन्हें भी इसका पता तब जला जब बृहस्पतिवार को कैदी से मिलने उनके पिता पहुंचे थे। शुक्रवार को अभिरक्षा से फरार होने के बाद वह मेटाडोर से अपने घर की तरफ जा रहा था।

जेल में मिले मेहनताने के ढाई सौ रुपये उसकी जेब में थे, उसी से उसने मेटाडोर का किराया दिया था। पुलिस ने तुरंत इस पहलू पर एक्सरसाइज शुरू कर दी और कैदी हत्थे चढ़ गया। दिलचस्प बात यह है कि जिस युवती से दुराचार के आरोप में संजय सजा काट रहा है वह भी शादी के बाद टिहरी विस्थापित क्षेत्र पथरी में रह रही है।
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