उत्तर प्रदेश (यूपी) के बिजनौर स्थित अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में दो बाघों का कत्ल कराने वाला मास्टर माइंड अमरा घटना के खुलासे के बाद से गिरफ्त में नहीं आ सका है।
माना जा रहा है कि अमरा पकड़ा जाए तो यूपी और उत्तराखंड में सक्रिय वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिल सकती है।
हरिद्वार निवासी अमरा की गिरफ्तारी के लिए सेंट्रल वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (सीडब्लूसीसीबी) यूपी और उत्तराखंड की सुरक्षा एजेंसियों की मदद से लगातार दबिश दे रहा है।
बच जाता है हर बार
15 दिसंबर को कार्बेट रिजर्व, यूपी एसटीएफ और सीडब्लूसीसीबी ने संयुक्त अभियान में अमानगढ़ से 12 शिकारियों को गिरफ्तार किया था। उनसे बाघ की खाल और हड्डियां मिली थीं। उन्होंने दो बाघ मारने की बात कबूली थी। लेकिन शिकार का पूरा खाका तैयार करने वाला अमरा अब तक नहीं पकड़ा जा सका है।
सूत्र बताते हैं कि हरिद्वार के पथरी के पास एक गांव का रहने वाला अमरा ही वह शख्स है, जिसने अमानगढ़ में बाघों का शिकार करवाया। शिकारी अमरा को पहले से जानते थे और पहले भी बाघों की हत्याएं कर उनकी खाल, हड्डियां और अंग उसे पहुंचा चुके थे।
पुलिस दे रही दबिश
हालांकि, अब तक यह पता नहीं चल सका है कि अमरा इन शिकारियों से वन्यजीवों के अंग लेने के बाद आगे कहां पहुंचाता था। सीडब्लूसीसीबी के निदेशक निशांत वर्मा ने बताया कि अमरा की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सुरक्षा एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है। बताया कि अमरा की गिरफ्तारी के बाद तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।