अपराध दबाने से नहीं दबता बल्कि सुलझाने से सुलझता है लेकिन यह बात हल्द्वानी पुलिस के गले नहीं उतरती।
पुलिस ने बरती कोताही
सात साल की लाडली की निर्ममता से दुराचार के बाद हत्या के मामले में पुलिस शुरू से लापरवाही बरत रही है। मसलन घटना के बाद परिवार की बातों पर यकीन नहीं करना, साक्ष्य को इकट्ठा करने में कोताही बरतना आदि शामिल है।
इसी का नतीजा था कि लाडली के साथ गैंगरेप के पांच दिनों बाद गौलापार जंगल में लाश मिली। अभियुक्तों को पकड़ने के लिए एसटीएफ को बुलाना पड़ा। समझा जाता है कि अब वरिष्ठ अधिकारी भी लापरवाही पर पर्दा डालने में लगे हैं। सीएम की घोषणा के दस दिन बाद तक अपर सचिव जांच की खानापूर्ति पूरी नहीं कर सके।
मुख्यमंत्री ने 28 नवंबर को लाडली के परिजनों से मुलाकात की। परिजनों ने मुख्यमंत्री को बताया कि घटना के बाद ही लाडली के ताऊ ने उस डंपर चालक को पकड़ लिया था जिसे गिरफ्तार करने के लिए एसटीएफ को पंजाब तक दौड़ लगानी पड़ी।
जिला पुलिस ने घटना के दिन ताऊ के कहने पर डंपर चालक को नहीं पकड़ा और नहर के पानी में बच्ची को ढूंढती रही। तमाम बातों को सुनकर सीएम ने लापरवाही की जांच के लिए अपर सचिव को निर्देश दिए।
दस दिनों में सीबीआई भी लापरवाही की जांच पूरी कर सकती है लेकिन प्रशासनिक जांच अभी पूरी नहीं हुई। क्योंकि यह मामला किसी वरिष्ठ नेता या ब्यूरोक्रेट से जुड़ा नहीं था। घटना एक आम बिटिया से जुड़ी है।
यही कारण रहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लापरवाही के आरोप में एक पुलिसकर्मी को भी दंडित नहीं किया। ये ऐसे अधिकारी हैं जो बाहर कुछ और अंदर पूरे सिस्टम को खराब करने के आदी रहे हैं।
एक सप्ताह बाद आएगी डीएनए रिपोर्ट
लाडली हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही के चलते मौके से फुट और फिंगर प्रिंट नहीं मिल सके। एसएसपी के पहुंचने पर पुलिस ने घेरा बनाया, मगर तब तक काफी लोग घटनास्थल पहुंच चुके थे।
इधर, फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. दयाल शरण का कहना है कि मामले में अहम साक्ष्य बनी डीएनए रिपोर्ट एक सप्ताह बाद नैनीताल पुलिस को देहरादून से उपलब्ध होगी। लाडली हत्याकांड के तीनों आरोपियों से पूछताछ में पुलिस ने कुछ जानकारियां हासिल की हैं, लेकिन अभी भी ठोस सबूत नहीं हैं।
नैनीताल जेल में बंद आरोपियों के ब्लड सैंपल लेने के बाद फोरेंसिक टीम और मुकदमे के विवेचक ने घटनास्थल के साक्ष्यों को देहरादून लैब भेजा था।