डाकपत्थर में अपनी रिश्तेदारी में घूमने के लिए आए तीन शातिर जाते समय बस को लेकर फुर्र हो गए। पुलिस इन तक पहुंचने में अगर जरा भी देर करती तो बस बिजनौर-छजलैट मार्ग पर दौड़ना शुरू कर देती। शातिरों ने आईएसबीटी पुलिस चौकी की कस्टडी से बस चोरी की थी।
शातिर चोर चेचिस नंबर बदलने के साथ बस पर दूसरी नंबर प्लेट इसी मकसद से लगा दी गई थी। अब सिर्फ परमिट का इंतजार था।
अब पुलिस भी मान रही है कि यदि सख्ती से जांच पड़ताल की जाय तो चोरी हुई अन्य बसों के तार भी इस अंतर राज्यीय से जुड़े हो सकते है।
यह बात गलत नहीं है कि पुलिस अपनी पर आ जाए तो उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। आईएसबीटी पुलिस चौकी से बस चोरी प्रकरण से एक बार फिर इस बात को बल मिला है।
चोरों में सबसे शातिर है शिवमः
साख पर सवाल उठे तो दो दिन में पुलिस ने बस चोरी की गुत्थी को सुलझा दी। बिजनौर के नूरपुर के रहने वाले तीनों चोर आपस में रिश्तेदार है। इनमें शिवम सबसे शातिर है। संदीप शिवम का चाचा है और अनिल वर्मा ममेरा भाई।
एसपी सिटी अजय सिंह बताते है कि यह तीनों डाक पत्थर रिश्तेदारी में आए थे। 17 की शाम सात बजे के करीब आईएसबीटी पर आ गए। वहां पर बस को खड़ी देखकर उन्होंने उसे ले जाने की योजना बना ली।
हालांकि उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि यह बस पुलिस कस्टडी में है। रात में 11.30 बजे के करीब बस को यहां से सीधा बिजनौर ले गए। शिवम ने बस को पेंट करने के लिए अपने एक परिचित के यहां छोड़ दी। सात दिन पहले ही बस को नूरपुर ले जाया गया, जहां पर उसका चेसिज नंबर बदला गया। यदि पुलिस नहीं पहुंचती तो जल्द ही बस सड़क पर दौड़ने भी लगती।
एक बस जांच में पाई गई सही:
पुलिस द्वारा बिजनौर के नूरपुर से बरामद की गई चार बसों में से एक जांच में सही पाई गई है। सत्यापन के बाद उक्त बस को मालिक के सुपुर्द कर दिया गया।
एक बस दिल्ली और दूसरी देहरादून से चुराए जाने की बात सामने आ रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद इन बसों के बारे में सही जानकारी मिल पाएगी।