इस वर्ष क्षेत्र में कई ऐसी हत्याएं हुई, जिसमें आरोपियों के सामने आने पर लोगों ने दांतो तले उंगली दबा ली। आरोपियों ने वारदात को अंजाम देते वक्त एक बार रिश्तों का भी ख्याल नहीं आया।
पोता ही निकला हत्यारा
खिसू विकास खंड में कठूली गांव में 6 जुलाई को 70 वर्षीय पूर्णा देवी की हत्या उसके 16 वर्षीय पोते सुमित ने ही कर दी, जिसे उसने पुलिस के समक्ष स्वीकार भी किया।
ऐसे ही एक और हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब 14 अक्तूबर को भक्तियाना के समीप कलमठ में 74 वर्षीय लाल सिंह का शव मिला। इस हत्याकांड में आरोपी के साथ उसकी बहू भी शामिल बताई गई। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
हत्यारे गिरफ्त से बाहर
श्रीनगर निवासी 21 वर्षीय आबिद का शव बलूड़ी गांव के समीप पुलिस को मिला, जिसके हत्यारे आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। बीते 28 नवंबर को राजकीय मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर विकास गिरी ने आत्महत्या कर ली।
विकास गिरी ने सुसाइड नोट लिखकर आगरा की एक युवती व उसके परिजनों पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था।