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खाई में मिला तीन माह से लापता युवक का कंकाल

Thu, 03 Oct 2013 09:36 AM IST
अमर उजाला, मसूरी/ देहरादून
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तीन माह पूर्व लापता एक युवक का कंकाल मसूरी रोड पर भट्टा गांव के पास खाई में मिला।
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उसका स्कूटर भी खाई में पड़ा हुआ था। शव के पास मिले ड्राइविंग लाइसेंस और कपड़ों से परिजनों ने युवक की शिनाख्त की। बुधवार सुबह घास लेने जंगल गई भट्टा गांव की महिलाओं को खाई में एक कंकाल मिला। सूचना पर मसूरी कोतवाल वीपी पंत मौके पर पहुंचे। कंकाल पर लिपटी जींस की जेब से पर्स में रखा ड्राइविंग लाइसेंस और एटीएम कार्ड बरामद हुआ।

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लाइसेंस में करनपुर निवासी विक्रांत ठाकुर (26) पुत्र गजेंद्र ठाकुर का नाम दर्ज था। पुलिस ने दून पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पता चला कि विक्रांत के अपहरण की रिपोर्ट 31 जुलाई को बिंदाल चौकी में दर्ज कराई गई थी। पुलिस की सूचना पर विक्रांत की बहन करिश्मा, ममेरा भाई अमित पुंडीर और दोस्त सुभाष पुरोहित मौके पर पहुंचे।
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अमित ने कंकाल की शिनाख्त विक्रांत के रूप में की। परिजनों ने बताया कि विक्रांत 31 जुलाई को बिंदाल चौकी के पास स्थित दफ्तर गया था। दोपहर दो बजे के बाद वह दफ्तर से स्कूटर पर निकला, जिसके बाद से उसका पता नहीं चल रहा था।

पुलिस ने आशंका जताई कि घटना के दिन कोहरे और धुंध के चलते विक्रांत स्कूटर से नियंत्रण खो बैठा होगा और 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। विक्रांत के पिता का पहले ही निधन हो चुका है।

सीए क्वालीफाई न करने से परेशान था विक्रांत
विक्रांत चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहता था। विक्रांत वरिष्ठ अधिवक्ता यशपाल पुंडीर के साले गजेंद्र ठाकुर का बेटा था। पुंडीर ने बताया कि कोर्ट में मुंशी गजेंद्र की पांच साल पहले मृत्यु हो गई थी। इसके दो साल बाद एक हादसे में विक्रांत की मां भी चल बसी। विक्रांत की एक बड़ी और एक छोटी बहन है। विक्रांत ने बीकॉम किया था और सीए बनना चाहता था।

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तैयारी के साथ वह कौलागढ़ स्थित राजेंद्र गुप्ता एंड कंपनी में सीए के साथ काम करता था। उसने अपना सपना पूरा करने के लिए दो बार सीए की परीक्षा भी दी, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। 31 जुलाई को सीए का रिजल्ट आया था। इसमें भी वह क्वालीफाई नहीं हो सका था। इसके बाद परेशान हालत में वह स्कूटर लेकर दफ्तर से निकल गया था और तीन माह बाद उसकी मौत की खबर परिजनों को मिली।
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शिनाख्त पर अब भी संदेह
पुलिस आईकार्ड, मोबाइल और कपड़ों के आधार पर कंकाल की शिनाख्त विक्रांत के रूप में भले कर रही हो, लेकिन उसकी शिनाख्त पर अब भी संदेह है। दरअसल, कई मामलों में शातिर अपराधी ऐसा तरीका अपनाते हैं जब किसी को मारकर किसी और की पहचान लगा दी जाती है। पुख्ता शिनाख्त के लिए डीएनए ही एकमात्र सहारा है। इंस्पेक्टर मसूरी वीसी पंत ने बताया कि परिजन मांग करेंगे तो डीएनए सैंपल लिया जाएगा।

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