फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किडनैपिंग मास्टर माइंड मीनाक्षी की अभिरक्षा में मौत

Tue, 17 Nov 2015 12:29 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून में बीएसएनएल अधिकारी के बेटे हर्षित तायल के अपहरण के आरोप में सुद्दोवाला जेल में बंद आरोपी युवती मीनाक्षी बालियान की अभिरक्षा में मौत हो गई।
विज्ञापन


तपेदिक से पीड़ित होने के कारण उसे जौलीग्रांट स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां रविवार की रात उसकी मौत हो गई। मीनाक्षी ने ही स्कूटी पर लिफ्ट देने के बहाने हर्षित को अगवा कराने की साजिश को अंजाम दिया था।

बसंत विहार के इंजीनियर एंकलेव निवासी बीएसएनएल अधिकारी गिरीश तायल के बेटे हर्षित का 29 नवंबर 2014 को अपहरण किया गया था। चार दिन बाद एक दिसंबर की सुबह दून पुलिस ने हरिद्वार के जगजीतपुर इलाके से हर्षित को बरामद करने के साथ पांच अपहरणकर्ताओं संजीव बालियान निवासी किनौनी (मुजफ्फरनगर), उसके बेटे आशीष बालियान, बेटी मीनाक्षी बालियान, फार्मेसिस्ट डेनियल निवासी गुरदासपुर पंजाब और सरनजीत उर्फ बिच्छू नंगली पट्टी अमृतसर पंजाब को गिरफ्तार किया था।
विज्ञापन


अपहरणकर्ताओं के पास से 34 लाख रुपये भी मिले थे। तब से पांचों आरोपी सुद्दोवाला जेल में हैं। जेल में रहते हुए मीनाक्षी तपेदिक की रोगी हो गई थी। इस साल मीनाक्षी को एक माह की जमानत मिली थी। जमानत अवधि पूरी होने के बाद 27 अक्तूबर को वह फिर से जेल में आई थी।

लेकिन इसके अगले दिन 28 अक्तूबर को उसकी हालत बिगड़ गई तो उसे दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। 31 अक्तूबर को मीनाक्षी को जौलीग्रांट अस्पताल रेफर किया गया था। रविवार रात मीनाक्षी की मौत हो गई। डोईवाला पुलिस ने पीएम कराने के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

उपचार में नहीं रही कोताही
सुद्दोवाला जेल के अधीक्षक महेंद्र सिंह का कहना है कि मीनाक्षी बालियान के उपचार में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। जमानत के दौरान मीनाक्षी द्वारा दवा का सेवन न किए जाने के कारण उसका इलाज बीच में टूट गया था। जेल में दाखिल होने के अगले दिन ही उसे दून अस्पताल में भर्ती किया था, जहां से उसे जौलीग्रांट भेजा गया था।

15 दिन से थी भर्ती
अपहरण के मामले में आरोपी मीनाक्षी अभिरक्षा में 15 दिन से जौलीग्रांट में भर्ती थी। रविवार रात को मीमो आया तो उसकी मौत का पता चला।
- राम नरेश शर्मा, जौलीग्रांट चौकी प्रभारी

मीनाक्षी का था अहम रोल
हर्षित को उठाने से लेकर फिरौती की रकम वसूलने तक में मीनाक्षी का अहम रोल था। अपहरण से पहले मीनाक्षी ने डेनियल के साथ पांच दिन तक रेकी की थी। अपहरण वाले दिन भी हर्षित को रोककर उसने सवाल किया कि अंग्रेजी वाले टीचर का मकान कहां है। वह ढूंढ नहीं पा रही है।

स्कूटी पर बैठकर मीनाक्षी उसे जीएमएस रोड पर सुनसान इलाके में ले गई थी। फोन करने के बहाने स्कूटी रुकवा ली थी। इसी बीच पीछे से आए साथियों ने छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए हर्षित को जबरन कार में डाल लिया था।
विज्ञापन


हाईस्कूल पास मीनाक्षी ने पकड़े जाने पर पुलिस को यह कहकर गुमराह करने की कोशिश की थी कि छेड़छाड़ का सबक सिखाने के लिए उसे उठाया था। मारपीट के बाद उसे छोड़ दिया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें