देहरादून के वाणी विहार से अगवा डेढ़ साल का वंश 24 घंटे बाद शिव लोक कॉलोनी से सकुशल मिल गया।
गुरूवार को वंश की बरामदगी की खबर से पुलिस के आला अधिकारियों ने राहत की सांस ली। पुलिस का दावा है कि संदेह के आधार पर कई लोगों से हुई पूछताछ के दबाव की वजह से ही उसकी रिहाई संभव हो सकी। अपहरणकर्ता फंसने के डर से वंश को शिव लोक कॉलोनी में छोड़कर भाग गए।
पुलिस दावा कर रही है कि जल्द ही अपहरणकर्ता को भी ढूंढ लिया जाएगा। इधर एसएसपी वंश को लेकर जब उसके घर पहुंचे तो मां के साथ ही परिजनों की आंखें उसे सकुशल देखकर खुशी से नम हो गईं। रायपुर के वाणी विहार निवासी सतीश कुमार का डेढ़ साल का बेटा वंश बुधवार सुबह घर के बाहर खेलते समय गायब हो गया था।
वंश के गायब होने की गुत्थी सुलझाने और उसे सकुशल बरामद करने के लिए एसएसपी ने एसओजी के साथ ही कई थानों की फोर्स को लगाया था। इसके अलावा मुखबिर भी सक्रिय किए गए थे। पुलिस ने रात में इलाके के कई संदिग्धों के अलावा कई तांत्रिकों को भी पूछताछ के लिए उठाया था।
काफी प्रयास के बाद भी पुलिस को वंश का सटीक सुराग नहीं मिल रहा था। इसी बीच गुरुवार दोपहर दो बजे शिव लोक कॉलोनी से 100 नंबर पर एक डेढ़ साल के बच्चे के मिलने की काल ने पुलिस अफसरों के कान खड़े कर दिए। मौके पर पहुंची पुलिस ने वंश को अपनी सुपुर्दगी में लिया।
बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते वंश को लेकर सतीश के आवास पर पहुंचे। बेटे को सकुशल देखकर मां किरण की आंखों से खुशी के आंसु छलक गए। वो काफी देर अपने बच्चे को चूमती रही। पूरे परिवार ने वंश के मिलने पर पुलिस का आभार जताया। पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह ने कहा कि पुलिस अपहरणकर्ता को तलाश रही है, जल्द ही उसका भी पता लगा लिया जाएगा।
रौतेला परिवार की इंसानियत को सलाम
शिव लोक कॉलोनी के दिनेश रौतेला परिवार की इंसानियत और सूझबूझ के चलते ही वंश के घर पहुंचने की राह आसान हो गई। बालक को गले लगाने वाले इस परिवार की बहू ने अमर उजाला में छपी तस्वीर के आधार पर वंश को पहचाना और पहले अमर उजाला फिर 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।
वाणी विहार से अगवा सतीश के डेढ़ साल के बेटे वंश को अपहरणकर्ता दोपहर के समय शिव लोक कॉलोनी में छोड़ गए होंगे। ऐसा पुलिस का भी मानना है। डेढ बजे के करीब गाय से डरकर सड़क पर पड़ा वंश रो रहा था। इसी बीच स्थानीय निवासी और ओएलएफ कर्मचारी दिनेश रौतेला का बेटा आर्यश ने वंश को रोता हुआ देखा।
फौरन उसने गाय को भगाया और बच्चे को गोद में लेकर चुप कराने की कोशिश की। डरा सहमा मासूम चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इस पर आर्यश ने आवाज लगाकर मां ऊषा रौतेला और पिता दिनेश रौतेला को बुलाया। ऊषा ने वंश को गोद में लेकर उसे चुप कराया।
पहले तो किसी को मासूम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी, इसके चलते ही उसके बारे में आसपास पूछताछ शुरू की। पर किसी से भी सही जवाब नहीं मिला। इसी बीच उषा रौतेला की देवरानी सुनीता ने अमर उजाला में छपे फोटो के आधार पर वंश को पहचान लिया और फौरन अमर उजाला आफिस के नंबर पर फोन किया। इसके बाद 100 नंबर पर इसकी जानकारी दी गई।
पुलिस ने भी रौतेला परिवार को शुक्रिया कहा और माना कि अगर वंश कहीं गलत हाथों में पड़ जाता तो उसका मिलना मुश्किल हो जाता। अमर उजाला परिवार भी आर्यश और रौतेला परिवार को उसकी सूझबूझ और इंसानियत के लिए सलाम करता है।