मुजफ्फरनगर में तैनात बीएसएनएल के हिंदी अधिकारी गिरीश तायल का घर दून स्थित इंजीनियर एन्क्लेव में है। घर में उनकी पत्नी और बेटा हर्षित (17) रहते हैं।
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हर्षित क्लेमेंटटाउन स्थित राजा राममोहन राय एकेडमी में 12वीं का छात्र है। 29 नवंबर की शाम हर्षित मोबाइल रिचार्ज कराने जीएमएस रोड स्थित एक दुकान में गया था।
रात साढ़े आठ बजे तक जब हर्षित घर नहीं पहुंचा तो उसकी तलाश शुरू हुई। परिजन उसे ढूंढने निकले तो घटनास्थल पर उसकी स्कूटी और कुछ दूर चप्पलें बरामद हुई। इसी बीच हर्षित के फोन से ही उसके पिता को कॉल आई।
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बताया गया कि फोन करने वाले ने हर्षित की रिहाई के बदले पांच करोड़ की फिरौती मांगी। सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। रात में ही बसंत विहार पुलिस ने फिरौती के लिए अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया।
लेकिन बाद पिता गिरिश तायल ने अमर उजाला से बातचीत में बेटे के दिल्ली में सुरक्षित मिलने का दावा किया। उधर, मां ने भी अपहरण की बात से इनकार कर दिया था।
पहली बार अपराध में अपनाया पेशेवर अंदाज
देहरादून में बीएसएनएल अफसर के बेटे का अपहरण करने वाले भले ही नौसिखिए थे, लेकिन वारदात को अजांम देने का इनका अदांज पेशेवर था।
हर्षित के अपहरण से लेकर फिरौती वसूलने तक 24 घंटे के भीतर उन्होंने हर्षित के परिजनों को कुल 13 फोन कॉल्स की। पुलिस को चकमा देने के लिए आरोपी डेनियल ने तीन कॉल हर्षित के फोन से, बाकी फर्जी आईडी से खरीदे गए सिम से किए।
उसने बाइक पर घूमते हुए परिजनों को कॉल्स की, जिससे मोबाइल लोकेशन जानने में पुलिस को पसीना आ गया। इंजीनियर एंकलेव से शनिवार शाम हर्षित को उठाने के बाद डेनियल उसका मोबाइल लेकर सहारनपुर की सीमा में पहुंच गया।
उसी फोन से उसने सहारनपुर पहुंचकर हर्षित के पिता गिरीश तायल को तीन कॉल की। यह कदम सिर्फ पुलिस को भ्रमित करने के लिए उठाया था। यहीं पर डेनियल ने हर्षित का सिम तोड़ दिया।
इसके बाद फर्जी आईडी वाले सिम से 10 कॉल की। डेनियल लगातार बाइक पर घूमते हुए हर्षित के पिता को फोन पर फरमान सुनाता रहा। इससे उसके नंबर की लोकेशन गागलहेड़ी, भगवानपुर, रुड़की, शिवालिक नगर आसपास मिली। पुलिस जब तक लोकेशन कंफर्म करती डेनियल दांव देकर निकल जाता।
जेल गए पांचों अपहरणकर्ता
हर्षित अपहरण में गिरफ्तार युवती समेत पांचों आरोपियों को मंगलवार कोर्ट में पेश किया गया। यहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। पुलिस चौदह दिन में कोर्ट के आदेश पर हर्षित से बदमाशों की शिनाख्त परेड कराने की कोशिश करेगी।
इंजीनियर एनक्लेव से शनिवार रात अगवा हर्षित तायल को बरामद कर पुलिस ने मुख्य आरोपी संजय बालियान, बेटी मीनाक्षी, बेटे आशीष, साथी डेनियल और सरनजीत को गिरफ्तार किया था। उनसे फिरौती के 34 लाख रुपये और अपहरण में इस्तेमाल चार वाहन, पांच फोन बरामद किए थे।
मेडिकल के बाद मंगलवार को पुलिस ने आरोपियों को ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट द्वितीय की कोर्ट में पेश किया। उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। पकड़े जाने से पहले आरोपियों ने दो मोबाइल फोन से व्हाट्स एप डाटा डिलीट कर दिया था। यह बदमाशों के खिलाफ बड़ा साक्ष्य बन सकता है।
एसटीएफ ने उसे रिकवर करने में जुट गई है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाया जा रहा है।
लोकेशन की गफलत में बदला शिकार मुख्य आरोपी संजय बालियान राज्य निर्माण निगम के इंजीनियर के मकान से परिचित था। संजय ने खुद आने के बजाय बेटे और बेटी को इंजीनियर एनक्लेव का रास्ता बताकर भेज दिया था।
गलती से दोनों तायल के मकान को इंजीनियर का मकान समझ बैठे। अक्सर मीनाक्षी और भाई आशीष रेकी करने आते थे। एक, दो दिन मीनाक्षी अकेली इधर-उधर घूमती रही।
मोतीचूर में पटकनी खा गई थी पुलिस?
हर्षित अपहरण मामले में पुलिस को अंदाजा भी नहीं था कि मोतीचूर का रेलवे पुल फिरौती वसूली का सुरक्षित ठिकाना हो सकता है।
हालांकि पहले से ही सतर्क पुलिस ने लक्सर, हरिद्वार, ज्वालापुर और एथल के बीच अपना जाल बिछा रखा था, लेकिन मोतीचूर के पास गिरीश तायल के पैसों से भरा सूटकेस फेंकने से पुलिस चकरा गई।
सूटकेस फेंकने की जगह जब तक रायवाला पुलिस पहुंचती, काफी देर हो चुकी थी। रकम जाने के साथ अपहर्ता का मोबाइल बंद होने पर पुलिस के हाथ पैर फूल गए थे। पुलिस अपहरणकर्ता और हर्षित के पिता से हो रही बातचीत सुन रही थी। इस लिहाज से ट्रेन से ही पूरी घेराबंदी की गई थी।
पुलिस मान रही थी कि फिरौती की रकम ऐसे इलाके में फेंकी जा सकती है, जहां से सड़क मार्ग ज्यादा दूरी न रखता हो। यही सोचकर तैयारी की गई थी।
अपहरणकर्ता ने पहले लक्सर स्टेशन पर रकम लेने की बात कही, फिर यू टर्न लेकर आगे बताने को कह दिया। मोतीचूर के पास ट्रेन की स्पीड घटी तो टार्च की रोशनी दिखने पर सूटकेस फेंकने के लिए कहा।
सबकुछ इतनी जल्दी में हुआ कि ट्रेन सवार पुलिस अधिकारी हक्के-बक्के रह गए। ट्रेन से रायवाला पुलिस को दौड़ाया। तब तक बदमाश का फोन भी बंद हो चुका था। फिरौती मिलने के बाद हर्षित की रिहाई हुई तब पुलिस की जान में जान आई।
अपहर्ताओं के चंगुल से निकलने के बाद हर्षित भी पुलिस के शक के दायरे में था। बेटा लौटने के बाद पिता ने फोन कर पुलिस को हरिद्वार क्षेत्र में बुला लिया था।
इसके बाद हर्षित से बातचीत शुरू हुई। युवती द्वारा लिफ्ट लेकर अपहरण की कहानी पर पुलिस ने विश्वास नहीं किया। हर्षित हर सवाल नकारता रहा।
इसी बीच हर्षित ने इंजेक्शन लगाने वाली बात कही तो पुलिस ने निशान देखा। यहीं से बड़ा क्लू भी मिला। युवती का जिक्र आने पर चर्चा हुई एक सेंट्रो कार में युवती देखी गई थी।
चेकिंग प्वाइंट पर नंबर नोट भी किया गया है। नंबर के आधार पर पुलिस पहले मालिक तक पहुंची। मालिक ने पुलिस को संजय बालियान के घर पहुंचा दिया।