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सरकार नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला गैंग चढ़ा हत्थे

Sat, 19 Sep 2015 01:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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स्पेशल टास्क फोर्स ने रेलवे, ओएनजीसी, बीएचईएल आदि सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गैंग के सरगना समेत दो को गिरफ्तार किया है। अप्रैल माह में गिरोह ने ओएनजीसी की फर्जी वेबसाइट बनाकर नौजवानों से  22 लाख रुपये ठग लिए थे।
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नोएडा और दिल्ली में सेंटर बनाकर यह लोग देशभर में ठगी करते थे। इनके पास से 13 मोबाइल, 11 सिम और भारी मात्रा में सरकारी महकमों के जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं। मंगलौर का रहने वाला गिरोह का एक बदमाश अभी फरार है। वेबसाइट और जाली स्टांप बनाने वाले भी पुलिस कार्रवाई के दायरे में आएंगे।

स्पेशल टास्क फोर्स के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते ने शुक्रवार को बताया कि ओएनजीसी के अधिकारियों ने इस साल 1 अप्रैल को कैंट कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था कि कुछ जालसाजों ने उनकी फर्जी वेबसाइट बनाकर भर्तियों के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से करीब 22 लाख रुपये ठग लिए गए। एसटीएफ की जांच पड़ताल में प्रयुक्त तमाम मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट आदि फर्जी पाए गए। करीब साढ़े पांच माह की भागदौड़ के बाद एसटीएफ गिरोह तक पहुंच सकी।
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दिल्ली और नोएडा में सेंटर बनाकर देश भर में ठगी

गुरुवार को हरिद्वार बाईपास के पास गिरोह के सरगना सैय्यद आसिफ उर्फ आशु उर्फ अमन मिश्रा उर्फ अनुराग शर्मा उर्फ राजू सैनी पुत्र सैय्यद नजीर निवासी शिव विहार दिल्ली (हाल सेक्टर 12 नोएडा गौतमबुद्ध नगर) और मनोज कुमार वर्मा निवासी तुगाना (बागपत) को गिरफ्तार किया है।

इनके तीसरा साथी मोहित निवासी उदलहेडी थाना मंगलौर की तलाश में दबिश चल रही है। आरोपियों के पास से लैपटाप, स्टोरेज डिवाइस, ओएनजीसी, बीएचईएल, गैल की फर्जी बनाई रबड स्टांप के अलावा वोटर आईडी, पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि सामान बरामद हुआ है।

2012 में इन ठगों ने किसान काल सेंटर के नाम से ठगी शुरू कर दी थी। इससे पहले यह दून की पाम सिटी और हरिद्वार में रहकर अपना गोरखधंधा चला चुके हैं।

लैपटॉप और डिवाइस से खुलेगा ठगी का राज
एसटीएफ जालसाजों से अभी उतना ही उगलवा सकी है, जितना उसे पता था। बरामद हुए लैपटॉप और स्टोरेज डिवाइस से काफी कुछ मिलने की उम्मीद है। देर रात तक टीम पूछताछ में जुटी थी।

शातिर सैय्यद और मनोज वर्मा उतना ही बोले, जितना एसटीएफ द्वारा पूछा गया। एसएसपी सदानंद दाते मानते हैं कि अभी काफी कुछ बाहर आना बाकी है।
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ठगी के इनके तरीके चौंका देंगे, जानिए

गिरफ्त में आए मनोज ने सिलसिलेवार ठगी के इस गोरखधंधे की जानकारी दी। वेब मेकर सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड नोएडा से ओएनजीसी, भेल और गैल आदि कंपनियों की वेबसाइट बनवाने के बाद समाचार पत्रों के माध्यम से इन कंपनियों के नाम पर भर्ती का विज्ञापन दिया जाता था। संपर्क सूत्र में दिए जाने वाले मोबाइल नंबर फर्जी आईडी पर होते थे।

आरोपी मनोज ने बताया कि बेरोजगारी के चलते उन्हें काफी कॉल आती हैं। औपचारिकता के नाम पर रकम वसूलने के बाद उनका नाम संबंधित कंपनी की वेबसाइट पर डाल दिया जाता है। चयनित सूची में नाम डालकर उनसे मुंह मांगी रकम वसूली जाती है। बकायदा इसके बाद उन्हें ज्वाइनिंग का लेटर डाक द्वारा भेजा जाता है। जब तक उनकी ठगी की पोल खुलती है, तब तक वह मोबाइल, खाते और वेबसाइट को ब्लॉक कर गायब हो जाते हैं।

आठवीं फेल बोलता है फर्राटेदार अंग्रेजी
गिरोह का सरगना खुद को आठवीं पास बता रहा है, लेकिन उसकी फर्राटेदार अंग्रेजी इस बात की गवाही नहीं देती है। कई भाषाओं का ज्ञान रखने के साथ उसका रहन-सहन भी ए क्लास का है। तीन बरस से यह लोग इस ठगी के धंधे में लिप्त हैं, लेकिन पहली बार पकड़ में आए हैं। एसएसपी सदानंद दाते का कहना है कि अब तक पांच लोगों की संलिप्तता सामने आई है।

हादसे में चल बसा रेलवे में ठगी का मास्टर
एसटीएफ एसएसपी सदानन्द दाते ने बताया कि सैय्यद का एक साथी करीब एक साल पहले हादसे में मौत के मुंह में चला गया था। रेलवे विभाग में वह ठगी का मास्टर था। उसने रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी की गई थी, क्योंकि इस विभाग में उसकी गहरी पैठ थी।
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