सड़क अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बन रही थी। उसका इस्तेमाल देश की सुरक्षा में होना था, लेकिन निर्माण कार्य के मानकों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री लगाकर सड़क बना दी गई। एक करोड़ से अधिक का घपला करने वालों ने यह भी नहीं सोचा कि ऐसी सड़क पर सेना देश की रक्षा कैसे करेगी?
फर्जी बिल लगा दिया
सारा खेल ठेकेदारों, सीमा सड़क संगठन और हिलवेज कंपनी ऋषिकेश के अधिकारियों की मिलीभगत से खेला गया। सड़क निर्माण में पत्थर तो आसपास से लाकर लगाए गए लेकिन उन्हें लाया सैकड़ों किमी दूरी से दिखाया गया।
अपनी बात को प्रमाणित करने के लिए फर्जी बिल लगा दिया। अब लेफ्टिनेंट कर्नल समेत पांच लोगों ने सीबीआई की विशेष अदालत में सरेंडर किया है। पांचों पर आपराधिक षड्यंत्र और फर्जीवाड़ा से एक करोड़ से अधिक का चूना लगाने का आरोप है।
अदालत ने पांचों आरोपियों को 11 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। अमित शर्मा, दिनेश और हिलवेज कंपनी ऋषिकेश को गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
जोशीमठ-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का मामला
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जोशीमठ-मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब सात किलोमीटर तक चौड़ीकरण होना था। सेना मुख्यालय ने वर्ष 2008 में इसे बनाने का निर्णय लिया।
सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सड़क बनाने के लिए माल की सप्लाई की जिम्मेदारी मैसर्स हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई। संविदा शर्तों के अनुसार मार्ग निर्माण सामग्री को लेबोरेटरी टेस्ट के बाद स्वीकार किया जाना था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
आरोप है कि लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट फर्जी तैयार की गई। निर्माण कार्य की लागत 236 प्रतिशत बढ़ाकर दिखाई गई। प्रकरण में सीबीआई ने 22 सितंबर 2012 को कई धाराओं में मामला दर्ज किया। कंपनी सहित अन्य अफसरों के खिलाफ 26 फरवरी 2014 को चार्जशीट दाखिल की।