दिल्ली विकास प्राधिकरण के प्लाट आवंटन मामले की कई दिनों तक दून में पड़ताल करने के बाद दिल्ली से दून पहुंची सीबीआई के हाथ कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं।
प्रारंभिक जांच में दून का दर्शाया गया पता और मृत्यु प्रमाण के फर्जी होने की पुष्टि हुई है। वहीं, चार अन्य प्लॉट के आवंटन में भी गड़बड़ी सामने आई है। दून में जांच करने के बाद सीबीआई दिल्ली लौट गई है। दिल्ली सीबीआई इस मामले में पांच मुख्य आरोपियों सहित कई अन्य के खिलाफ एक महीने के भीतर चार्जशीट दाखिल करने जा रही है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने दिल्ली द्वारिकापुरी में 275 गज का प्लाट एक महिला को लॉटरी के जरिए आवंटित किया गया था। यह प्लॉट तीन से चार बार बिक चुका है, जो अब एक डॉक्टर दंपति के पास है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में विकास कार्यों को लेकर सरकार ने 1989 में लोगों की भूमि का अधिग्रहण किया था, जिन लोगों की भूमि अधिग्रहीत की गई, उन्हें द्वारिका, रोहिणी दिल्ली में प्लॉट आवंटित किए गए।
भूमाफिया ने डीडीए अधिकारियों से मिलकर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार इन प्लॉटों के आवंटन में एक महिला को खड़ा किया। जिसे द्वारिका में करोड़ों रुपये का 275 गज का प्लॉट आवंटित किया गया।
मूल रूप से पंजाब की रहने वाली इस महिला ने दून का जो पता और पति का मृत्यु प्रमाण पत्र दिया था, वह दिल्ली से दून पहुंची सीबीआई को जांच में फर्जी मिला है। वहीं, चार अन्य प्लॉटों के आवंटन में भी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पता चला है कि जिस व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र होना दर्शाया गया, उस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं।
ऐसे पकड़ में आया मामला
प्लॉट आवंटन के लिए महिला ने पति का जो मृत्यु प्रमाणपत्र दर्शाया, उसमें मुहर निरीक्षक की लगी थी। जबकि उत्तराखंड में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए निरीक्षक या उप निरीक्षक जैसी कोई संस्था नहीं है।
जांच में फर्जी मिला प्रमाणपत्र
जिला पंचायत राज अधिकारी मो. मुस्तफा खान ने जांच के बाद सीबीआई को बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र में जो मुहर लगी है, वह ग्रामीण क्षेत्रों में रजिस्ट्रार उपयोग में नहीं लाते हैं। जांच में कहा गया कि यह प्रमाण पत्र प्रथम दृष्टया फर्जी तरीके से तैयार किया गया है। सीबीआई यह रिपोर्ट भी दिल्ली साथ ले गई है।
ऐसे पहुंचा मामला सीबीआई तक
विभागीय सूत्र बताते हैं कि जिस व्यक्ति का यह प्लाट था उसने कभी लोन लिया था। किसी अधिकारी ने जब यह प्लॉट खरीदना चाहा तो उसने अपने स्तर से पड़ताल करवाई तो पता चला कि प्लाट पर लोन है। पड़ताल हुई तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।