पिछले साल अक्तूबर में रिश्वत के मामले में गिरफ्तार सेना के सिविल क्लर्क प्रताप सिंह के खिलाफ सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया है। सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में आरोपी के पास आय से करीब चार गुना अधिक 1.24 करोड़ रुपये संपत्ति मिली है।
अधिकारियों का मानना है कि वेतन के बचत के हिसाब से प्रताप सिंह की संपत्ति 35 लाख से अधिक नहीं हो सकती थी। मामले की जांच पड़ताल के लिए सीबीआई देहरादून की टीम दो दिन से लैंसडौन में डेरा जमाए हैं। टीम इस बात की जांच कर रही कि आरोपी ने किसी और कर्मचारी को तो अपना शिकार नहीं बनाया है। कई कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है तो कई से चल रही है।
गत वर्ष सीबीआई देहरादून की टीम ने लैंसडौन गढ़वाल राइफल्स में कार्यरत एक सिविल क्लर्क प्रताप सिंह को चार लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोपी सेना के लैंसडौन स्थित क्यू विभाग में सिविलियन कर्मचारी था।
रिश्वत न देने पर एरियर की राशि हड़प लेने की धमकी दी थी
सेना के सिविलियन विभाग में ही लोहार के पद पर कार्यरत मोहन सिंह ने सिविल क्लर्क प्रताप सिंह पर उससे आठ लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। आरोप यह भी था कि रिश्वत नहीं देने पर प्रताप सिंह ने उसकी एरियर की राशि हड़प लेने की धमकी दी थी। इसकी शिकायत मोहन सिंह ने देहरादून सीबीआई अफसरों से की थी जिसके बाद प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था।
सूत्रों के अनुसार रिश्वतखोरी के इस मामले में अन्य कर्मचारियों से पूछताछ के लिए सीबीआई देहरादून की एक टीम दो दिन से लैंसडौन में जमी हुई है। प्रताप सिंह के खिलाफ रिश्वत मामले में सीबीआई ने इसी माह सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।
सीबीआई को संदेह है कि आरोपी प्रताप सिंह ने अन्य कर्मचारियों को भी अपना शिकार बनाया होगा। इसी के चलते सीबीआई ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि यहां पहुंचे सीबीआई अधिकारियों ने सिविल कर्मचारियों से उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, वेतन, एरियर भुगतान से संबंधित मामलों व उनमें बरती गई अनियमितताओं के बारे में अलग-अलग पूछताछ कर विस्तार से जानकारी ली है।