दस लाख के ईनामी अमित मलिक उर्फ भूरा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को अब चमत्कार की आस है।
महीने भर की भाग दौड़ के बाद भी सुराग नहीं
अगर कहीं से अचानक ही कुछ हो जाए तो अलग बात है वरना महीने भर की भाग दौड़ के बाद पुलिस के पास उसका कोई सुराग तक नहीं है।
कुछ दिन पहले यह मान लिया गया था कि वह नेपाल जाकर छुप गया है लेकिन उसका वहां भी कुछ पता नहीं चला है। दिल्ली पुलिस ने नेपाल पुलिस से संपर्क कर उसकी जानकारी की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
अगर फरार चल रहे टीकरी चेयरपर्सन राजबाला या सचिन खोखर में से कोई हाथ आ जाए तो भूरा तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है लेकिन इन दोनों का भी कोई सुराग पुलिस के पास नहीं है। दोनों भूरा के साथ रुड़की के तिहरे हत्याकांड में साथ रहे थे। इसके बाद भूरा की फरारी में सबसे अहम रोल सचिन का ही रहा।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अगर राजबाला पकड़ी गई तो टिहरी जेल में बंद उसका बेटा सुनील राठी दबाव में आ जाएगा, फिर भूरा तक पहुंचना मुश्किल नहीं होगा। इसी तरह अगर सचिन हाथ आ गया तो भी भूरा तक पहुंचा जा सकता है।
पुलिस ऐसा मानकर चल रही है कि सचिन को जानकारी है कि भूरा कहां छुपा है, लेकिन पुलिस के अगर और मगर की कहानी तब अधूरी है जब तक दोनों में से कोई हाथ नहीं आता है।
बाकी हथियार कहां गए?
यूपी और उत्तराखंड पुलिस को 10 दिन पहले यह जानकारी मिली थी कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दोनों एके-47 और एक एसएलआर बरामद कर ली है।
ये हथियार भूरा गैंग ने देहरादून पुलिस से लूटे थे, लेकिन इनमें से बरामदगी सिर्फ एक एके-47 की हुई है। अब पुलिसवाले भी यह सोचकर हैरान हैं कि बाकी हथियार कहां हैं?
अगर बरामद हुए तो अभी तक क्यों नहीं दिखाए गए और अगर रिकवरी ही नहीं हुई तो यूपी और उत्तराखंड पुलिस के पास खबर क्यों पहुंची?