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भर्ती के नाम पर और भी हुए ठगी का शिकार

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपी मृणाल धूलिया ने उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में पूर्व कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा के नाम पर वसूली की है। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद कई युवा दबी जुबान में मृणाल की पोल खोल रहे हैं। उनका कहना है कि एक साल से न तो नौकरी मिली और न वह पैसा लौटा रहे हैं।
दरअसल, आयुर्वेद विवि में नर्सिंग के 30 पदों पर भर्ती होनी है। तत्कालीन कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा के समय इस पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी दौरान, मृणाल धूलिया कई युवाओं के संपर्क में आए। आरोप है उन्होंने एक पद पर नियुक्ति के लिए युवाओं से पांच से सात लाख रुपये लिए। एक पीड़ित ने बताया कि उन्हें धूलिया ने ही कहा था कि वह मृत्युंजय मिश्रा के बहुत करीबी हैं। इसलिए वह उनकी आसानी से नियुक्ति करा देंगे। इसी दौरान, मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि से हटा दिया गया। उसके बाद से युवा खुद को ठगा महसूस करने लगे, लेकिन इतनी भारी भरकम रकम फंसने की वजह से वह सामने नहीं आए। एक पीड़ित ने बताया कि वह एक साल से धूलिया से अपना पैसा मांग रहे हैं, लेकिन वह पैसा देने में आनाकानी कर रहे हैं। मृणाल धूलिया के खिलाफ शुक्रवार को बेरोजगार आयुर्वेदिक डिप्लोमा फार्मेसिस्ट संघ प्रदेश अध्यक्ष आजाद डिमरी ने नेहरू कालोनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप हैं उन्होंने युवाओं से करीब डेढ़ करोड़ रुपये वसूले हैं। आरोपी काफी समय से बेरोजगाराें को नौकरी का झांसा देता आ रहा है। निरीक्षक राजेश शाह ने बताया कि जांच के दौरान कई और युवकों से ठगी किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि अभी शिकायत लेकर कोई सामने नहीं आया है। मामले में मृणाल धूलिया का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो मराठी भाषा में जवाब मिला कि उनका नंबर स्विच ऑफ था। इससे प्रतीत हो रहा है कि उनका फोन महाराष्ट्र में है। जब उनका पक्ष आएगा तो उसे प्रकाशित किया जाएगा।
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आयुर्वेद विवि में गहरी पैठ रखता था मृणाल
देहरादून। आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ठगी के आरोपी मृणाल की गहरी पैठ थी। वह अपनी मर्जी के हिसाब से कई कर्मचारियों को भी प्रताड़ित करता था। मृणाल की पूर्व कुलपति व कुलसचिव के कार्यकाल में भी काफी अच्छी सेटिंग रही है।
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मृणाल धूलिया के बारे में कई तरह की चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि मृणाल की एंट्री मिश्रा से भी पहले हो चुकी थी। पूर्व के कुलपतियों अरुण त्रिपाठी, कुलसचिव अनूप गक्खड़ के कार्यकाल में भी मृणाल यहां काम करते आ रहा था। मृत्युंजय मिश्रा के आने के बाद उनकी पैठ और बढ़ गई। इसके बाद वह जैसे चाहते थे, वैसा ही होता था। विवि ने पीपीपी मोड में काम शुरू किया तो वह भी मृणाल को ही दिया गया। मृणाल का इस दौरान भुगतान भी रुका, जिस पर काफी विवाद भी हुआ। बीच में मृत्युंजय मिश्रा के विवि से विदा होने के बाद मृणाल शांत रहा, लेकिन जब मिश्रा अप्रैल में विवि पहुंचे तो मृणाल भी उनके साथ ही था।
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