पति की गैर इरादतन हत्या के लिए दोषी ठहराई गई महिला को अदालत ने पांच साल की कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा सुनाते हुए महिला की सामाजिक व आर्थिक स्थिति के साथ ही उसकी मिर्गी की बीमारी को भी ध्यान में रखा। इस सब को ध्यान में रखकर महिला को पांच साल का साधारण कारावास किया जाता है। वही अभियोजन की ओर से अदालत से महिला को सख्त से सख्त सजा की मांग की गई।
2006 की घटना
गैर इरादतन हत्या का यह मामला सितंबर वर्ष 2006 का कोतवाली थाना क्षेत्र का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार चंदर नगर निवासी गीता करवाल का 16 सितंबर वर्ष 2006 को अपने पति सुखदेव करवाल से झगड़ा हुआ था, मृतक के छोटे भाई विजय ने झगड़े के अगले दिन 17 सितंबर को सुखदेव के घर के भीतर जाकर देखा तो सुखदेव की बायीं आंख से खून निकल रहा था, वे घर पर बेहोश था, जिसकी कुछ समय बाद मौत हो गई।
सप्तम अपर सत्र न्यायालय सुशील तोमर की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन की ओर से मामले में ग्यारह गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाहों को पेश किया गया। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र सिंह पुनिया ने अदालत से महिला को सख्त से सख्त सजा दिए जाने को कहा।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाई सजा
मामले में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर महिला को सजा सुनाई गई। महिला के हाथ की टूटी चूड़ियां उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने में अहम रही, महिला की टूटी चूड़ियों का मिलान किया गया। वही गवाहों के बीच भी विरोधाभास नहीं दिखा।
गवाहों ने कहा झगड़ते थे दोनों
अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों ने कहा कि पति और पत्नी का अक्सर झगड़ा होता रहता था।
पहले बेटी को खोया फिर पति
अदालत में सजा सुनाए जाने के बाद गीता ने कहा कि उसका विवाह 1988 में हुआ था, विवाह के बारह साल बाद उसे एक बेटी हुई, बेटी का नाम ज्योति था, ज्योति की डेढ़ साल की उम्र में बीमारी के चलते मौत हो गई, पति की मौत के बाद ससुराल में अब उसका कोई नहीं है, उसने आरोप लगाया कि जमीन के विवाद के चलते उसे झूठे मामले में फंसाया गया है, जिस दिन उसके पति की मौत हुई उस दिन वे घर पर नहीं थी।
गीता के मायके से पहुंचे थे सभी
गीता के मायके की ओर से आज उसका पूरा परिवार अदालत पहुंचा हुआ था, उसकी 80 वर्षीय मां बसंत कौर, पिता गोविंद राम, दो भाई तजिंदर व तिलकराज व दोनों छोटी बहने पहुंची हुई थी। बेटी को सजा का फैसला आते ही मां बसंत कौर रोने लगी। उसने आरोप लगाते हुए कहा कि बेटी की संपत्ति पर उसके देवर की नजर लगी थी।