आराघर से शराब की 2072 पेटियां पकड़ीं
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
आबकारी विभाग और पुलिस ने आराघर स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान व गोदाम में छापेमारी कर शराब की 2072 पेटियां पकड़ी हैं। इस शराब का स्टॉक रजिस्टर में कोई ब्योरा नहीं मिला। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आबकारी विभाग ने गोदाम और दुकान के कागजात जब्त कर लिए।
रायवाला में एसओजी और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद मंगलवार को आराघर में भी छापेमारी हुई। आबकारी विभाग और पुलिस ने आराघर स्थित दुकान और गोदाम में छापेमारी की। वहां से 2072 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की गई है। स्टॉक रजिस्टर में इस शराब का कोई ब्योरा टीम को नहीं मिला। नियमानुसार संचालक को 31 मार्च तक स्टॉक में उपलब्ध शराब का ब्योरा देना था। आबकारी टीम ने संचालक से रिकॉर्ड मांगे तो वह आनाकानी करने लगे।
मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट मनुज गोयल के हस्तक्षेप के बाद आबकारी विभाग ने सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए। जानकारों के मुताबिक पकड़ी गई शराब की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। महंगे ब्रांड की यह पुराने स्टॉक की शराब नई कीमतों पर बेची जा रही थी। विभागीय नियमों के अनुसार प्रत्येक एक हजार पेटी शराब पर करीब 27 लाख रुपये एक्साइज ड्यूटी देनी होती है। ऐसे में पकड़ी गई शराब पर 54 लाख रुपये से अधिक की एक्साइज ड्यूटी चुकानी होगी। विभागीय अधिकारियों ने दस्तावेज कब्जे में लेने के बाद संचालक को स्टॉक एंट्री व डिटेल का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
----
ज्यादातर दुकानों में चल रहा खेल
शराब की दुकानों को वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर अपने स्टॉक का ब्योरा देना होता है, लेकिन ज्यादातर दुकानों ने स्टॉक का ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया है। वह पुराने स्टॉक की शराब को नई कीमतों पर बेच रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष में संचालकों को स्टॉक का पूरा ब्योरा देकर उस पर अधिभार के मुताबिक टैक्स देना होता है।
-----
कम कीमत पर गईं ज्यादातर दुकानें
देहरादून। जिले की विदेशी और देशी मदिरा की दुकानों के 30 अप्रैल तक संचालन के लिए मंगलवार को टेंडर प्रक्रिया हुई। पांच बजे तक टेंडर जमा हुए, जिन्हें देर शाम खोला गया। देर रात तक टेंडर खोलने की प्रक्रिया जारी रही। ज्यादातर दुकानें मौजूदा संचालकों को ही आवंटित की गई है। टेंडर में भी उन्हें प्राथमिकता दिए जाने का जिक्र किया गया था। वहीं केवल 25 दिन के लिए दुकान लेने में अन्य लोगों ने ज्यादा दिलचस्पी भी नहीं दिखाई। यही कारण है कि ज्यादातर दुकानें निर्धारित कीमत से कम में बिकीं।
जिला आबकारी अधिकारी की ओर से दो अप्रैल को छह अप्रैल से 30 अप्रैल तक शराब की दुकानों के संचालन के लिए राजस्व ऑफर मांगे गए थे। इसमें मौजूदा संचालकों को प्राथमिकता देते हुए अधिकतम राजस्व देने वालों को दुकानों का आवंटन किया जाना था। इससे पहले एक से पांच अप्रैल तक जिले की विदेशी मदिरा की 18 और देशी मदिरा की 21 दुकानों का संचालन दैनिक राजस्व के आधार पर किया जा रहा है।