ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दून की शांत आबोहवा और खुशगवार मौसम सैलानियों को भाता है और कानून व्यवस्था अपराधियों को। देशभर में बड़े बड़े अपराध कर गुनाहगार दून में पनाह ले रहे हैं। पुणे की ‘रावण’ गैंग के गुर्गों का पकड़ा जाना यहां नई बात नहीं है। इससे पहले भी यहां बड़े इनामी बदमाशों ने दून में पनाह ली।
माना जाता है कि उत्तराखंड पुलिस उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे प्रदेशों की पुलिस के जैसे कठोर कदम नहीं उठाती। लिहाजा, बदमाशों ने इसे पनाहगाह के तौर पर विकसित कर लिया है।
मामला एक : गुड़गांव का कौशल गैंग
हरियाणा पुलिस ने अप्रैल 2018 में ऑपरेशन क्लीनअप चलाया था। गुड़गांव की कौशल गैंग पर जब हरियाणा पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया तो कुल छह इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से पांच लाख रुपये के इनामी रणबीर सिंह समेत चार मोस्टवांटेट को दून से ही गिरफ्तार किया गया। हरियाणा पुलिस ने दावा किया था कि वह अपने तीन साथियों के साथ खुलेआम देहरादून में घूम रहा था। रणबीर को वर्ष 2004 में उम्रकैद की सजा भी सुनाई जा चुकी है।
मामला दो : पंजाब का कुख्यात सिम्मा
पंजाब पुलिस का मोस्ट वांटेड हरसिमरन दीप ‘सिम्मा’ वहां अकाली दल के नेता के बेटे की हत्या व अन्य अपराध कर अपने तीन साथियों के साथ देहरादून में आ छिपा। 14 जनवरी 2018 को पंजाब की सीआईए ने कौलागढ़ क्षेत्र से चारों को गिरफ्तार कर लिया। सिम्मा पर वहां पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसने हरियाणा के भी कई शहरों में जघन्य अपराधों को अंजाम दिया था।
मामला तीन : नाभा जेल ब्रेक का आरोपी परमिंदर
वर्ष 2016 में नाभा जेल से छह कैदियों को मुक्त कराने और एक पुलिसकर्मी की हत्या करने का आरोपी परमिंदर सिंह देहरादून के रायपुर की आलीशान कोठी में रह रहा था। शामली में जब उसकी गिरफ्तारी हुई तो उसने यह बात उगली कि कई दिनों से उसने उसी कोठी में पनाह ली। इसके बाद कोठी के मालिक को दून पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पता चला कि परमिंदर ने अपने साथियों के साथ यहीं से जेल ब्रेक की साजिश रची थी।