ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पुलिस महकमे में करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पदोन्नति के विवाद में उलझ गई है। नए रंगरूटों को एक साल का प्रशिक्षण देकर 2021 में प्रस्तावित महाकुंभ में तैनात करने की योजना है, लेकिन पदोन्नति न होने के कारण भर्ती का रास्ता साफ नहीं हो पा रहा है। विभागीय प्रमोशन के बाद कांस्टेबल के करीब 1500 पद रिक्त होने हैं। इसके अलावा फायर महकमे में पांच सौ के करीब फायरकर्मियों की भर्ती होनी है।
नवंबर 2000 में उत्तराखंड को पृथक राज्य का दर्जा मिल गया था, लेकिन पुलिस की नियमावली नहीं बन पाई थी। यूपी की नियमावली में थोड़ा बदलाव कर विभागीय पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। उत्तराखंड पुलिस नियमावली का मसौदा तैयार होने के कारण वर्ष 2018 में कैबिनेट की मुहर लगी। इसी आधार पर पुलिस मुख्यालय चुनाव आचार संहिता लगने के छह माह पहले से ही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में था। इसी बीच पदोन्नति का आधार बदलने के कारण यह प्रक्रिया विवादों में उलझ गई।
बता दें, पुलिस महकमे में पहले सराहनीय सेवा के आधार पर पदोन्नति होती थी। नई नियमावली में पदोन्नति का आधार वरिष्ठता बनाए जाने से आपत्तियों का अंबार लग गया। पुलिस मुख्यालय ने नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव दिया, जिस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। बहरहाल लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने नई भर्तियों की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय ने नए सिरे से कवायद शुरू कर दी है।
विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने के साथ जल्द से जल्द भर्ती शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। महाकुंभ से पहले ही चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण पूरा कराने का प्रयास है। महाकुंभ में पहला स्नान 14 जनवरी 2021 को होना है। इसी लिहाज से अक्तूबर तक महाकुंभ में प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना है।
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अशोक कुमार, पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था