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जोखिम में जान, फिर भी नहीं रहे मान

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ब्यूरो/ऋषिकेश। शहर में ट्रैफिक नियमों को तोड़कर लोग अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सुरक्षित सफर और सुरक्षित जीवन का संदेश शहर में पूरी तरह से बेमानी साबित हो रहा है। बड़े, बुजुर्ग, महिलाएं और कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए यहां यातायात नियम कोई मायने ही नहीं रखते। सभी नियमों की धज्जियां उड़ाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। पुलिस द्वारा शहरी क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर किए गए 348 वाहन चालकों के चालान इसकी तस्दीक करते हैं, मगर फिर भी लोग यातायात नियमों की अनदेखी से बाज आते नजर नहीं आ रहे।
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नियम के मुताबिक दुपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट पहनना अनिवार्य है, लेकिन तीर्थनगरी में यह नियम लागू नहीं होता है। वजह पुलिस ने यहां जब भी हेलमेट लागू करने की पहल की तो कई छोटे मोटे नेता और संगठन इसका विरोध करने लगे। लिहाजा नगर क्षेत्र में रोजाना नेशनल हाईवे और आंतरिक मार्गों पर युवक, महिलाएं और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं दुपहिया वाहन पर बिना हेलमेट और ट्रिपल राइडिंग करते हुए फर्राटा भरते आसानी से दिखाई पड़ते हैं। शहर में दुपहिया चलाने वाला हर तीसरा व्यक्ति यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाता आसानी से दिखाई देता है। यहां लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना मंजूर है, मगर नियमों का पालन करना नहीं।
अधिकारी भी हैं जिम्मेदार
ऋषिकेश। इस सबके लिए संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस की लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं है। दोनों महकमों के अधिकारियों ने लोगों को नियमों का उल्लंघन करने की खुली छूट दे रखी है। खानापूर्ति के लिए कुछ लोगों के चालान कर दिए जाते हैं, मगर नियम का सख्ती से पालन कराने के लिए कोई भी अधिकारी गंभीरता नहीं दिखाता। इससे संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस का यातायात नियमों के प्रति जागरूकता अभियान भी सवालों में है।
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सात दिन में वसूला हजारों रुपये का जुर्माना
ऋषिकेश। यातायात नियमों की अनदेखी पर कोतवाली पुलिस पिछले सात दिनों के भीतर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 348 लोगों के चालान कर चुकी है। पुलिस ने नियम कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों से करीब 58 हजार रुपये का राजस्व भी वसूला है। बावजूद हालात जस के तस हैं।
हादसे में हेलमेट न पहनने से होती है अधिक मौतें
ऋषिकेश। दुपहिया वाहन चलाते वक्त हेलमेट नहीं पहनने से वाहन सवार के साथ सड़क हादसे होने पर मौत की संभावना काफी बढ़ जाती है। एम्स के निदेशक प्रोफेसर डा. रवि कांत के मुताबिक देश में दुपहिया सवारों की दुर्घटना का शिकार होने से 90 प्रतिशत मामलों में सिर्फ उनकी मौत इस वजह से हो जाती है, क्योंकि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। बावजूद लोग खुद की सुरक्षा ताक पर रखकर सड़कों पर निकलते हैं।

पर्याप्त फोर्स नहीं होने के चलते दिक्कत है, लेकिन लोगों को खुद भी अपनी सुरक्षा के प्रति गंभीर होने की जरूरत है। लोगों को जानकारी होने के बाद भी वह हेलमेट नहीं पहनते और ट्रिपल राइडिंग करते हैं। लोगों को भी खव्ुद से नियमों का पालन करना चाहिए, यह उन्हीं की सुरक्षा से जुड़ा है।
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- वीरेंद्र सिंह रावत, सीओ, ऋषिकेश
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