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जांच अधिकारी ने संदिग्ध छात्रों के मूल डाक्यूमेंट जांच को लिए

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर में पिछले साल अगस्त में बीएएमएस में प्रवेश प्रक्रिया में धांधली कर प्रवेश लेने के मामले में पुलिस जांच अधिकारी ने संदिग्ध छात्रों के मूल डाक्यूमेंट अपने कब्जे में लिए हैं। परिसर के निदेशक ने विश्वविद्यालय की ओर से मिले डाक्यूमेंट जांच अधिकारी को सौंपे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है।
उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) -2016 की 7 अगस्त को हुई प्रवेश परीक्षा में मुन्नाभाई पकड़े गए थे। पकड़े जाने वाले आरोपी छात्र हरिद्वार के ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर के थे। उनके कबूलनाने पर ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में जांच कराई गई। जिसमें 2012 से 2016 के प्रवेश लिए गए छात्र-छात्राओं के प्रवेश परीक्षा से लेकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट तक के शैक्षिक डाक्यूमेंट की जांच हुई। जिसमें 2013 और 2014 बैच के 30 छात्रों के मामले संदिग्ध पाए गए। जिन पर कार्रवाई करते हुए परिसर प्रशासन ने 23 अगस्त को इन सबको निष्कासित कर दिया था। परिसर के तत्कालीन निदेशक प्रो. एएन पांडेय की तहरीर पर आरोपी छात्रों के खिलाफ नगर कोतवाली में फर्जीवाड़ा करने पर मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन तीन महीने पूर्व उन सभी को दोबारा से एडमिशन दे दिया गया। अब अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच अधिकारी दिनेश सिंह शनिवार को परिसर निदेशक प्रो. सुनील जोशी से संदिग्ध 30 छात्रों के मूल डाक्यूमेंट परिसर निदेशक से लिए। जांच अधिकारी ने बताया कि मूल डाक्यमेंट की जांच कराई जाएगी।
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यह है संदिग्ध छात्र
छात्रों में दानिश अली, मोहम्मद अकरम, अंकित कुमार, मोनीश आलम, वसीम अहमद, रोहित भटनागर, अजय कुमार, पुलकित आर्य, अजय भूषण, मोहम्मद सकलैन, दीदार सिंह, रविकांत सैनी, जावेद अनवर, गौरव टम्टा, हेमंत बिजल्वाण, मोहम्मद इरफान, शिव कुमार गुप्ता, दीपक कुमार, अब्दुल कादिर, शादाब अली, गुरनाम सिंह, सरवेज अली, मोहम्मद अहमद, राहुल, बिलाल अहमद, अनुज कुमार, मोहम्मद फैजान, आमिर हुसैन, राव गुडडु, अब्दुल रहमान शामिल हैं।
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वर्जन
विश्वविद्यालय से छात्रों के मूल दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कराए गए, जोकि जांच अधिकारी को सौंप दिए गए है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसी के अनुसार अग्रिम कार्रवाई होगी।
प्रो. सुनील जोशी, निदेशक, ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर।
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