ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
बुजुर्गों पर होने वाले अत्याचार हमारी पहल से रोके जा सकते हैं। इसके सामाजिक जागरूकता से साथ सामूहिक पहल की जरूरत है। यह बातें पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने बृहस्पतिवार को हेल्पेज इंडिया की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में कहीं। इस मौके पर जगूड़ी ने अपने अनुभव भी साझा किया। इसके अलावा कई अतिथियों ने सुझाव दिए।
पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि आज भी बुजुर्ग अपने पर होने वाले अत्याचारों के बारे में खुल कर बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि उत्पीड़न की शुरुआत बच्चों के साथ होने वाले व्यवहार से ही होती है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने माता-पिता से अच्छे व्यवहार के साथ-साथ बच्चों के साथ भी नेक व्यवहार करें। सीओ डालनवाला जया बलूनी ने कहा कि पुलिस विभाग बुजुर्गोें पर होने वाले अत्याचारों की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। बुजुर्गों की समस्या के बाबत 2013 एक सेल बनाया गया था, जिसमें लगभग 1400 मामले दर्ज हुए और समाधान कराया गया। बलूनी ने कहा कि शहरी इलाकों की अपेक्षा देहात में बुजुर्गों के साथ कम अत्याचार होने के आंकड़े सामने आए हैं। उत्तराखंड सिनियर सिटीजन फेडरेशन के अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता ने कहा कि घर के नकारात्मक व्यवहार से बच्चों के संस्कार में प्रभाव पड़ता है। हेल्पेज इंडिया के राज्य प्रमुख चैतन्य उपाध्याय ने कहा कि बुजुर्गों के साथ हो रहे अत्याचारों का मुख्य कारण परिवारों के बीच आपसी मतभेद हैं। इस मौके पर हेल्पेज संस्था ने देश के 22 राज्यों में किए गए सर्वे की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में डॉ. आदर्श बंसल और कृष्णा अवतार समेत प्रदेश के विभन्न जिलों के बुजुर्ग शामिल हुए।