ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
अमर उजाला को सलाम, जिसने मेरे मातृत्व का सम्मान किया। अमर उजाला सही में सच के साथ खड़ा है। चार साल बाद अपने जिगर के टुकड़े को पाकर अभिभूत हुई मां ने इसी अंदाज में अमर उजाला का आभार जताया। 2017 में एक बार तो पुलिस ने उनकी बात को झुठला कर मामला थाने से ही निपटा दिया था। हिम्मत नहीं हारी, लंबी लड़ाई जरूर लड़नी पड़ी, लेकिन नतीजा बेहद सुखद रहा।
पीड़ित महिला के मुताबिक शादी के कई वर्ष बाद तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो 2014 में सरोगेसी से औलाद प्राप्त करने का फैसला लिया। इसके लिए सरोगेट मदर से अनुबंध किया गया। अनुबंध के आधार पर गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक सभी खर्च उठाए, लेकिन सरोगेट मदर ने डिलीवरी के दौरान जुड़वा बच्चों में से एक को मृत बताकर दूसरा बच्चा छिपा लिया। उस समय भरोसा कर लिया था, लेकिन 2015 में सरोगेट मदर के साथ एक बालक देखकर मन में संदेह घर कर गया। सरोगेट मदर के पहचानवालों से पूछताछ के बाद शक पक्का हो गया। इस पर सरोगेट मदर से दूसरे बच्चे के जिंदा होने का दावा किया तो सरोगेट मदर बच्चे समेत गायब हो गई। इसी आधार पर 2017 में ऋषिकेश कोतवाली में लिखित शिकायत की। इसके बाद पुलिस सरोगेसी से जुड़े एक शख्स को पकड़ लाई और मामला थाने से रफा-दफा कर दिया। उस समय पुलिस से बहुत निराशा हुई थी। अमर उजाला ने उनकी बिना शिकायत के ऋषिकेश पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाकर हौसला बढ़ाया। एसटीएफ की एसएसपी रिधिम अग्रवाल ने अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर उनके दर्द को सुना और सरोगेसी मदर को ढूंढ निकाला। फिर भी बच्चा नहीं मिला। इसके बाद ऋषिकेश कोतवाली निरीक्षक रितेश शाह और उनकी टीम के प्रयासों के बाद बच्चा मिल गया। इस कार्य के लिए पुलिस और अमर उजाला को सलाम।