क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल
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आठ साल में 13 बार लिखी गंगाजल
अपराध के बिना कोई कहानी संभव ही नहीं है। झा ने इसके लिए महाभारत का उदाहरण दिया। कहा कि इस महाकाव्य में सभी तत्व हैं। भाईयों के बीच झगड़ा और अत्याचार जो एक बेहतरीन कहानी है। प्रकाश झा ने कहा कि वह निर्देशक और निर्माता से पहले एक लेखक हैं। उन्होंने आठ सालों में गंगाजल 13 बार लिखी है। आगे कहा कि वह समाजसेवी नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा हैं। कहा कि अब मैं जनादेश पर लिख रहा हूं। समाज से अपराध के रिश्ते के बारे में उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपराधियों के लिए प्रार्थना करते हैं। पुलिस के पास जाने के बजाय हम उन शक्तिशाली व्यक्तियों जिन्हें बाहुबली कहा जाता है के पास जाते हैं। बाहुबली समाज में अपनी धाक और प्रभुत्व से व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि समाज इनकी इस ताकत को उत्सव की तरह मनाता है। एआई के बारे में उन्होंने कहा कि यह अब जीवन में घुस चुका है। इससे आने वाले समय में नए-नए अपराध हो सकते हैं।
वोट बैंक का हिस्सा बन गई थी बाटला हाउस की घटना : करनैल सिंह
दूसरा सत्र बाटला हाउस एनकाउंटर का नेतृत्व करने वाले पूर्व आईपीएस करनैल सिंह के नाम रहा। उन्होंने बाटला हाउस मुठभेड़ की सच्चाई पर चर्चा करते हुए कहा कि यह घटना वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बन गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी विशेष समुदाय का हिस्सा नहीं है, और फिल्मों में जो चित्रण किया जाता है, वह पूरी तरह से सत्य नहीं होता। इसलिए, उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी किताब लिखी, जिसमें पुलिस के कठिन कार्य और परिवारों की पीड़ा को उजागर किया। पूर्व आईपीएस करनैल सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों का काम कठिन होता है और लोग इसे पूरी तरह से समझते नहीं हैं। पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाटला हाउस मुठभेड़ एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने करनैल सिंह की किताब को सराहा और कहा कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण किताब है, जो देश की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है।