पुलिस और जनता दोनों की ही समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखंड में सीसीटीएनएन (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम) को लागू कर दिया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पीएचक्यू पहुंचकर इसकी शुरूआत की। फिलहाल ऑन लाइन एफआईआर में तो समय लगेगा लेकिन ऑन लाइन शिकायत दर्ज करने की तैयारी भी की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह अति महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
सोलह करोड़ रुपए होंगे खर्च
उत्तराखंड में इसे धरातल पर उतारने में सोलह करोड़ रुपए खर्च होंगे। फिलहाल शुरूआत हो गई है और पिछले दस साल के पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटलाइज्ड करने का काम शुरू कर दिया है। प्रथम चरण में यही काम होगा।
प्रोजेक्ट को तीन चरणों में सम्पन्न किया जाना है। इस प्रोजेक्ट के किसी भी अपराधिक डाटा को ऑन लाइन एक क्लीक करके देखा जा सकेगा। फिलहाल राज्य के 112 थाने इंटरकनेक्ट कर दिए गए हैं।
सूचनाओं का आदान प्रदान होगा आसानी से होगा। इस प्रोजेक्ट के कोर्डिनेटर व वरिष्ठ आईपीएस नीलेश भरणे ने बताया कि राज्य के सभी थानों में केस डायरी लिखने के लिए चिप लगा एक इलेक्ट्रॉनिक पेन दिया गया है।
जो भी इस केस डायरी को लिखेगा उसके बाद यह चिप कंप्यूटर में लगाकर समस्त जानकारी खुद ही कंप्यूटर में ट्रांसफर हो जाएगी।
पब्लिक के लिए एक वेबसाइट खुलेगी
भरणे ने बताया कि दूसरे चरण में पब्लिक के लिए एक वेबसाइट खुलेगी, इसके तहत किसी को भी चरित्र प्रमाण पत्र, शस्त्र लाइसेंस आदि का सत्यापन भी इस वेबसाइट से हो सकेगा।
और, तीसरे चरण में सभी विभाग पुलिस के साथ कनेक्ट होंगे। सीसीटीएनएस को लागू करने वाला उत्तराखंड चौथा राज्य है।
एफआईआर ऑन लाइन होने में तो समय लगेगा लेकिन ऑन लाइन शिकायत दर्ज कराने की एक्सरसाइज जल्द शुरू होगी। 112 थानों में सीसीटीएनएस शुरू हो गया है। रिमोट के 13 स्थानों पर वी सैट लगाकर आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।