सरकार ने बीते वर्ष नवंबर माह में वन विभाग के मुखिया पद (हॉफ) पर विनोद सिंघल को तैनात किया था।इस पद पर राजीव भरतरी के हटने के बाद यह सवाल उठे कि सीनियर की जगह जूनियर अधिकारी को महकमे की कमान सौंप दी गई। इसे भरतरी के डिमोशन के तौर पर भी देखा गया।
प्रदेश के जंगलों में लगी आग पर वन महकमा नियंत्रण नहीं कर पा रहा है लेकिन महकमे के भीतर धधक रही आग को शांत करने लिए सरकार ने शीर्षस्थ अधिकारी (हेड ऑफ द फारेस्ट) के समांनातर एक पद सृजित कर दिया है।
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अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की ओर से एक शासनादेश जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि राज्यपाल की सिफारिश पर वन विभाग के अंतर्गत भारतीय वन सेवा (संवर्ग) नियमावली के तहत संवर्गीय पद की प्रकृति के समान एक प्रमुख वन संरक्षक (सर्वोच्च वेतनमान, लेवल-17) का पद अस्थायी रूप से एक वर्ष के लिए सृजित किया गया है।
संभवत: उत्तराखंड ही नहीं देश में यह अपनी तरह का पहला मामला है। जंगल की आग इसकी एक प्रमुख वजह हो सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं है। पद का सृजन वन महकमे की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भी नहीं किया गया है। चर्चा है कि सरकार ने यह व्यवस्था पूर्व में लिए गए एक निर्णय को सही ठहराने के लिए की है। दरअसल, सरकार ने बीते वर्ष नवंबर माह में वन विभाग के मुखिया पद (हॉफ) पर विनोद सिंघल को तैनात किया था।
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सरकार के इस निर्णय पर उठे थे सवाल
इस पद पर राजीव भरतरी के हटने के बाद यह सवाल उठे कि सीनियर की जगह जूनियर अधिकारी को महकमे की कमान सौंप दी गई। इसे भरतरी के डिमोशन के तौर पर भी देखा गया। भरतरी को सरकार ने जैव विविधता बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया था। उस वक्त सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठे थे। इसके बाद राजीव भरतरी ने सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। माना जा रहा है कि न्यायालय में सरकार अपने निर्णय से असहज स्थिति में है। कहा जा रहा है कि न्यायालय में विपरीत निर्णय आने की आशंका में हॉफ के समकक्ष एक नया पद सृजित किया गया है।
इस मामले में 18 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई है। माना जा रहा है कि यदि फैसला भरतरी के पक्ष में आता है तो ऐसे में सरकार को उन्हें पुन: हॉफ की कुर्सी सौंपनी पड़ सकती है। चर्चा है कि यदि निर्णय भरतरी के पक्ष में भी आता है तो उन्हें नए सृजित पद पर बैठाया जा सकता है, जिससे उनकी वरिष्ठता भी बनी रहेगी और सरकार अपने निर्णय पर भी कायम रह सकेगी। भरतरी अगले साल यानी अप्रैल 2023 में रिटायर हो जाएंगे।
यह एक सामान्य प्रक्रिया है। सरकार अपनी जरूरत के अनुसार निर्णय लेती है। पहले भी विशेष परिस्थितियों में पीसीसीएफ के पद सृजित किए गए हैं। सरकार ने जरूरत के अनुसार ही यह निर्णय लिया है। - आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव