मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से लेकर होटल व्यवसायी और आम आदमी तक निराश हुए हैं।
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उन्हें उम्मीद थी कि सचिन के आने से पर्यटक आएंगे और पहाड़ों की रानी में रौनक लौटेगी। लेकिन सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
सचिन के प्रवास के पांच दिन हो गए हैं, मगर मसूरी की तरफ पर्यटकों ने रुख नहीं किया है। ऐसे में लोगों के जेहन में यह सवाल उठने लगा है कि ऐसे सचिन उत्तराखंड के किस काम के?
तेंदुलकर के मसूरी आने से काफी उम्मीदें थीं
आपदा के बाद से पर्यटकों के आने की आस लगाए लोगों को सचिन तेंदुलकर के मसूरी आने से काफी उम्मीदें थीं। मुख्यमंत्री ने तो कई बार कहा कि सचिन के आने से अच्छा संदेश जाएगा और राज्य के पर्यटन व्यवसाय को इसका लाभ मिलेगा।
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प्रदेश के पर्यटन को पटरी पर लाने के लिए जुटे शासन-प्रशासन को भी लग रहा था कि सचिन के आने से उन्हें देखने आने वालों का तांता लगेगा।
डेड-लॉक टूटेगा। इसके लिए परिवहन विभाग लोगों को मसूरी भेजने के लिए अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार था।
जिला प्रशासन ने बैठक करके विभिन्न विभागों से पर्यटकों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कहा था। लेकिन सचिन पर्यटकों को खींच नहीं पाए।
परिवहन यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत का कहना है कि केवल एक बार सचिन को देखने के लिए सहारनपुर से 30 लड़के आए थे।
मसूरी घूमने आने वालों की संख्या कम
उनके कहने पर बस भेजी गई थी। उसके बाद से मसूरी घूमने आने वालों की संख्या कम हो गई है। परिवहन निगम के हिल स्टेशन प्रभारी स्वरूप सिंह बिष्ट का कहना है कि पिछले साल इसी महीने मसूरी की 80-90 ट्रिप लगती थीं।
इस वक्त अधिकतम 25-30 ट्रिप ही हो पाती है। उम्मीद थी कि सचिन को देखने जाने वालों का तांता लगेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
सचिन तेंदुलकर के मसूरी आने से पर्यटकों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई है। जो लोग सचिन को देखने आ रहे हैं वह स्थानीय हैं। लाल टिब्बा के आसपास के लोग ही सचिन के दीदार को पहुंच रहे हैं। सचिन के मसूरी में होने का होटल व्यवसाय पर कोई असर नहीं पड़ा है।
- अजय भार्गव, होटल व्यवसायी, मसूरी
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