दोपहर के 12 बजे हैं। तापमान 50 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है। शिद्दत की गर्मी है, लेकिन हज पूरा होने की खुशी ने इसका अहसास कम कर दिया है। एक तो हज प्रक्रिया पूरी हुई और दूसरे काशीपुर से आए नथवा हुसैन जो खो गए थे, आज मिल गए हैं। उनके गले का कार्ड कहीं गिर गया था, जिससे वह रास्ता भटक गए थे। हज समिति के अधिकारी और दूसरे साथी उन्हें ढूंढ लाए हैं। हम लोग तीनों शैतानों को आखिरी बार कंकड़ी मार रहे हैं।
जमरात में इस वक्त सुरक्षा बल बेहद चौकन्ना है। लोगों को हिदायत दी जा रही है कि आहिस्ता-आहिस्ता जाएं, हड़बड़ी न करें। हम लोगों ने तीनों शैतानों को आखिरी बार कंकड़ी मार ली है।
अब सफा-मर्वा पहाड़ियों के सात चक्कर काटकर रस्म पूरी करनी है। हम लोग दो पहाड़ियों के बीच खड़े हैं। यहां भी बहुत अधिक भीड़ है। यहां सुरक्षा बल के जवान हम लोगों पर निगाह रखे हुए हैं। अगर कोई भाग रहा है तो उसे फौरन टोक देते हैं। बुजुर्ग यात्री धीमे- धीमे यह रस्म पूरी करने में लगे हैं। हम लोगों ने सफा-मर्वा के चक्कर पूरे कर लिए हैं।