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सफर-ए-हज: तवाफ पूरी हुई तो दिल भर आया...

Sun, 27 Sep 2015 02:14 AM IST
मक्का से तारिक खान
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दोपहर के 12 बजे हैं। तापमान 50 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है। शिद्दत की गर्मी है, लेकिन हज पूरा होने की खुशी ने इसका अहसास कम कर दिया है। एक तो हज प्रक्रिया पूरी हुई और दूसरे काशीपुर से आए नथवा हुसैन जो खो गए थे, आज मिल गए हैं। उनके गले का कार्ड कहीं गिर गया था, जिससे वह रास्ता भटक गए थे। हज समिति के अधिकारी और दूसरे साथी उन्हें ढूंढ लाए हैं। हम लोग तीनों शैतानों को आखिरी बार कंकड़ी मार रहे हैं।
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जमरात में इस वक्त सुरक्षा बल बेहद चौकन्ना है। लोगों को हिदायत दी जा रही है कि आहिस्ता-आहिस्ता जाएं, हड़बड़ी न करें। हम लोगों ने तीनों शैतानों को आखिरी बार कंकड़ी मार ली है।

अब सफा-मर्वा पहाड़ियों के सात चक्कर काटकर रस्म पूरी करनी है। हम लोग दो पहाड़ियों के बीच खड़े हैं। यहां भी बहुत अधिक भीड़ है। यहां सुरक्षा बल के जवान हम लोगों पर निगाह रखे हुए हैं। अगर कोई भाग रहा है तो उसे फौरन टोक देते हैं। बुजुर्ग यात्री धीमे- धीमे यह रस्म पूरी करने में लगे हैं। हम लोगों ने सफा-मर्वा के चक्कर पूरे कर लिए हैं।
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लगा जैसे दिलो-दिमाग ने सोचना बंद कर‌ दिया

सूरज ढल रहा है। खाना-ए-काबा में बहुत भीड़ है। बड़ी संख्या में लोग तवाफ (परिक्रमा) कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि पैर अपने आप चल रहे हों। खाना-ए-काबा में रूहानी माहौल है। जैसे दिलो-दिमाग ने कुछ भी सोचना बंद कर दिया हो। सिर्फ परवरदिगार की तरफ लौ है और जेहन पर जज्बी कैफियत तारी है।

तवाफ पूरा हो गया। दिल भर आया है। अल्लाहताला ने हज करने का अरमान पूरा कर दिया। हम लोग अपने अजीजिया स्थित होटल के कमरे में जाएंगे। इसके बाद घर वापसी की तैयारी।

विशेष सहयोग- हाजी राव शेर मोहम्मद, चेयरमैन हज समिति उत्तराखंड
प्रस्तुति- रजा शास्त्री-9675898214

पाठकों की राय
सफर-ए-हज पढ़कर बहुत अच्छा लगा। हमारे मम्मी-पापा भी हज पर गए हैं। इसे पढ़कर लगता रहा जैसे हम भी कहीं न कहीं उनके साथ हैं।
- गुलफाम अली, देहरादून

हम हज पर नहीं जा पाए। यह तकलीफ दिल में रही, लेकिन सफर-ए-हज ने इससे बहुत राहत दिलाई। बिना गए हज कर लिया।
-इकबाल, रुड़की
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