बैंक की ओर से रामानंद पुरी पर आरोप लगाया गया की उन्होंने बैंक से लिए गए ऋण की बकाया धनराशि 34 लाख 57 हजार 687 रुपये व ब्याज हड़पने की गरज से धोखाधड़ी करते हुए बैंक में बंधक रखी संपत्ति को बिना बताए बिना बैंक की सहमति के विक्रय कर दिया है।
बैंक ने महंत रामानंद पुरी निवासी निरंजनी अखाड़ा मायापुर हरिद्वार और निर्मला पत्नी राजवीर निवासी बहादुरगढ़ हरियाणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए कोतवाली ज्वालापुर में प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया।
कोई कार्यवाही ना होने पर बैंक ने मुख्य प्रबंधक के द्वारा धारा 156 -3 के अंतर्गत न्यायालय मैं प्रार्थना पत्र दिया और मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगाई। प्रार्थना पर सुनवाई करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम कंचन चौधरी ने थानाध्यक्ष ज्वालापुर को मुकदमा दर्ज विवेचना कर न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए।