हाईकोर्ट ने कार्बेट में तस्करों को संरक्षण देने के मामले में पूर्व में कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन न करने पर मुख्य सचिव वन को अवमानना नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पीपुल्स फॉर एनिमल की अध्यक्ष गौरी मोलखी ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष ने मई 2014 को वर्तमान प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट एसएस शर्मा के संबंध में जांच रिपोर्ट पर मुख्य सचिव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
तस्करों को संरक्षण देने के आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि श्री शर्मा पर मार्च 2014 को वन विभाग के जांच अधिकारी एसके दत्ता ने 100 अलग-अलग मामलों में बाघ के तस्करों के साथ मिलीभगत के संकेत दिए थे। जिसके बाद सरकार ने धर्मवीर सिंह को जांच करने को कहा था।
पूर्व रिपोर्ट को सही पाने पर श्री शर्मा के निलंबन की संस्तुति की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि श्री शर्मा के खिलाफ तस्करों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप हैं।
इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकारी नहीं है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मुख्य सचिव वन को अवमानना नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।