कड़ाके की ठंड में रात भर मां के दरबार में बस एक ही कामना कर रही थी महिलाएं। संतान प्राप्ति की, लेकिन आस्था का ऐसा रूप देख हैरान रह जाएंगे। फिर जो हुआ वो...
मेरी झोली भर देई हे माता अनसूया, सुखी राखी मेरु कुटुंब परिवार...। संतान प्राप्ति के लिए माता अनसूया मंदिर पहुंचे 225 निसंतान दंपतियों ने मां अनसूया की रातभर अराधना और पूजा की।
दंपतियों के साथ ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी अनसूया मंदिर प्रांगण में रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन किए। रविवार को बणद्वारा, सगर, देवलधार, खल्ला और कठूड़ गांवों की मां ज्वाला ने अपनी बहिन अनसूया से विदा लेकर भक्तों को आशीर्वाद दिया।
सगर गांव की मां ज्वाला रात्रि प्रवास के लिए ग्वाड़ गांव पहुंची, जबकि अन्य सभी देव डोलियां अपने-अपने मंदिरों में विराजमान हो गईं। इसी के साथ दो दिवसीय माता अनसूया मेला भी संपन्न हो गया।
बीते शनिवार को रात आठ बजे तक निसंतान दंपतियों और देवी भक्तों ने अनसूया मंदिर प्रांगण में कीर्तन-भजन किया। रात करीब साढ़े नौ बजे मंदिर समिति की महिलाओं को माता अनसूया की पूजा के लिए बुलाया गया।
अनसूया माता मंदिर के पुजारी डा. प्रदीप सेमवाल ने निसंतान दंपतियों की ओर से सामूहिक संकल्प पूजा की। वहीं, मेले में रात्रि जागरण के दौरान भक्तों ने ऊंचू धाम तेरु माता अनसूया, हे मां, झोली मेरी भर देई, जय हो माता अणसी जैसे गढ़वाली भजनों की प्रस्तुति दी। कड़ाके की ठंड के बाद भी माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।