मतगणना शुरू होने के सात घंटे के अंदर आपको अपने सांसद का पता चल जाएगा। इस अवधि में लोकसभा के रिटर्निंग अफसर प्रत्याशी को जीत का प्रमाण पत्र दे देंगे।
16 मई को मतगणना के दिन चुनावी हार-जीत की तस्वीर दोपहर 12 बजे तक साफ होने लगेगी। मतगणना के राउंड जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे यह तस्वीर और स्पष्ट होती जाएगी।
मतगणना 10 से 15 राउंड चलेगी। इसमें करीब पौने छह घंटे लग जाएंगे। मतगणना के पहले राउंड में सबसे अधिक समय लगेगा और आखिरी राउंड में सबसे कम।
पहले राउंड में तकरीबन एक घंटा लगेगा। आखिरी राउंड 15 से 20 मिनट का होगा। इसके बाद अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के वोटों को संकलित किया जाएगा। पर्यवेक्षक इस पर अपनी अंतिम मोहर लगाएंगे। इसमें सात घंटे लग जाएंगे।
इस तरह काम करती है ईवीएम
ईवीएम खोलने की खानापूरी में आधा से पौन घंटा लगेगा। इसके बाद ईवीएम वोटों की संख्या बताने लगेगी। मशीन सबसे पहले कुल वोट बताएगी। इसमें 10 सेकेंड लगेंगे।
इसके बाद ईवीएम नंबर एक पर रहे प्रत्याशी के वोट बताएगी। ईवीएम के स्क्रीन पर प्रत्येक नंबर के प्रत्याशी के वोट सिर्फ आठ सेकेंड फ्लैश होंगे। 9 वें सेकेंड में अगले नंबर के प्रत्याशी के वोट फ्लैश होने लगेंगे।
इस आठ सेकेंड के फ्लैश में मतगणनाकर्मी कागज पर हर नंबर के प्रत्याशी के वोटों की संख्या नोट करेंगे। प्रत्याशी के मतगणना एजेंटों को भी इतने ही समय में प्रत्येक नंबर के प्रत्याशी के वोटों की तस्दीक करनी रहेगी। किसी के एतराज करने पर हर नंबर के प्रत्याशी के वोटों को फिर रिपीट कर दिया जाएगा।
प्रभारी कार्मिक एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह ने बताया कि मतगणना बढ़ने के साथ राउंड का समय कम होता जाएगा। सबसे ज्यादा राउंड 15 में चकराता विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग स्टेशनों के बूथों की मतगणना होगी। इसके आखिरी राउंड में सिर्फ तीन टेबिलों पर मतगणना होगी।
ईवीएम के लिए लगेंगी 14 टेबल
मतगणना स्थल पर विधानसभा क्षेत्रवार 14 टेबल लगाई जाएंगी। हर टेबल पर एक ईवीएम के वोटों की गिनती होगी। इस तरह पहले राउंड में 14 मशीनों के वोट गिने जाएंगे।
जब यह गिनती पूरी हो जाएगी तो फिर दूसरे चरण में 14 ईवीएम लाई जाएंगी। हर टेबल पर फिर एक मशीन के वोट गिने जाएंगे। यह क्रम तब तक चलता रहेगा जब तक सारी मशीनों की गिनती नहीं हो जाती।
बूथ अधिक तो मतगणना में देरी
जिस विधानसभा क्षेत्र में बूथों की संख्या अधिक होगी उसके मतगणना के राउंड अधिक हो जाएंगे। सबसे पहले ईवीएम की सील चेक होगी।
मतगणना का राउंड पूरा होने के बाद ईवीएम को कागजात समेत सुरक्षित रखा जाएगा। स्ट्रांग रूम से फिर अगले राउंड की मशीनें निकाल कर लाई जाएंगी।
कई चरणों में मिलान के बाद होगी घोषणा
एक राउंड की मतगणना पूरी हो जाएगी तो हर पोलिंग स्टेशन के बूथ वार वोटों का चार्ट तैयार होगा, जो सहायक रिटर्निंग अफसर के पास जाएगा। उसके दस्तखत के बाद यह चार्ट पर्यवेक्षक के पास भेजा जाएगा। पर्यवेक्षक के दस्तखत के बाद फाइनल हो जाएगा।
लोकसभा क्षेत्र के सारे विधानसभा क्षेत्रों के वोटों का चार्ट बनने के बाद प्रत्याशियों के खाते में हर विधानसभा क्षेत्र के वोट जोड़े जाएंगे। जब सारे वोट जुड़ जाएंगे तो पर्यवेक्षक एक बार फिर इसकी जांच करके दस्तखत करेंगे।
इसके बाद बैलट पेपर पर प्रत्याशी के नंबर के लिहाज से प्राप्त वोटों की घोषणा की जाएगी। सबसे अधिक वोट पाने वाला प्रत्याशी विजयी घोषित होगा। बाद में लोकसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अफसर उसे जीत का प्रमाण पत्र देंगे।
नाम से नहीं, नंबर से बताएंगे वोट
मतगणना के दौरान किसी प्रत्याशी का नाम लेकर वोट नहीं बताए जाएंगे, बल्कि बैलट पत्र में प्रत्याशी के नंबर के लिहाज से वोट पता चलेंगे। मशीन में नंबर एक, दो, तीन करके वोटों की संख्या आती रहेगी।
आखिर में एक बार फिर कुल योग दिखाया जाएगा। मतगणना में ईवीएम की सेंट्रल यूनिट से वोटों की गिनती की जाएगी। जब एक बूथ की मशीन सारे प्रत्याशियों के नंबरों के वोट बता देगी तो उस बूथ पर पड़े कुल वोटों का मिलान वहां के पीठासीन अधिकारी के रजिस्टर से किया जाएगा। मिलान के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
अलग होगी पोस्टल बैलट की गिनती
पोस्टल बैलट की गिनती सबसे पहले की जाएगी। पोस्टल बैलट की जांच के लिए चार टेबल लगाई जाएंगी। जिला निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि हर टेबल पर एडीएम रैंक का अधिकारी एआरओ होगा।