तीन साल में देश के बाघों की संख्या बढ़ी या घटी, जल्द ही यह साफ हो जाएगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान बाघों की गणना अक्तूबर से शुरू करने जा रहा है। इस काम में 40 हजार से अधिक वनकर्मी लगाए जाएंगे। उन्हें एक से तीस सितंबर तक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
वर्ष 2010 में हुई गिनती के मुताबिक देश में बाघों की संख्या 1701 थी। तीन साल में देशभर में कई बाघों का शिकार किया गया है, जबकि कई की प्राकृतिक मौत हुई। हालांकि, इस दौरान कुछ शावक भी जन्मे। ऐसे में बाघों की मौजूदा संख्या जानने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने तीसरी बार भारतीय वन्यजीव संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी है।
संस्थान के वैज्ञानिक डा. वाईके झाला के नेतृत्व में कैमरा ट्रैपिंग के जरिए करीब एक माह तक बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। यह गणना देश के 42 टाइगर रिजर्व के अलावा रिजर्व फारेस्ट क्षेत्रों में भी की जाएगी।
इन राज्यों में बहुतायत
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, आंध्र प्रदेश, मिजोरम, असम आदि
बाघों का वास स्थल
देश में बाघों का वास स्थल 32137.14 वर्ग किलोमीटर दायरे में है
बाघों की मौत
2013 - 55
2012 - 89
2011 - 80
बाघों की गणना की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस संबंध में विभिन्न राज्यों के नोडल अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। उन्हें जरूरी निर्देश भी दिए जा रहे हैं। संस्थान के वैज्ञानिक भी जुट गए हैं।
- डा. वाईके झाला, वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान
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