उत्तराखंड में ग्लेशियरों पर यात्रा करना आसान हो जाएगा। इसके लिए ट्रैकिंग रुटों पर कॉटेज की व्यवस्था की जाएगी।
कुमाऊं मंडल में ग्लेशियरों के अलावा छोटा कैलास और कैलास मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने के लिए इन ट्रैकिंग वाले मार्गों पर ट्रैकर्स और पर्यटकों के ठहरने के लिए 25 करोड़ रुपए की लागत से 145 कॉटेज बनाने की योजना को सरकार ने मंजूरी दे दी है।
सभी कॉटेज अगले साल तक बनकर तैयार हो जाएंगे। ट्रैकिंग रुटों पर कॉटेज की व्यवस्था होने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने से पर्यटन से होने वाली आय भी बढ़ने की उम्मीद है। मालूम हो कि हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक बागेश्वर जिले के पिंडारी और कफनी ग्लेशियरों के अलावा छोटा कैलास, कैलास मानसरोवर सहित अन्य ट्रैकिंग रूटों का रुख करते हैं। इन रूटों में अब तक ठहरने के लिए खास व्यवस्था नहीं है।
कुछ जगहों पर मार्ग में पड़ने वाले गांवों में सीमित व्यवस्था हो पाती है। पिंडारी और कफनी ग्लेशियर जाने वाले मार्ग में भी कुछ स्थानों पर लोनिवि के इक्का-दुक्का गेस्ट हाउस हैं जिनमें बहुत सीमित लोग ही ठहर सकते हैं। इस कारण कई लोग स्लीपिंग बैग आदि के सहारे से यात्रा करते हैं।
इन ग्लेशियरों और अन्य स्थानों की ट्रैकिंग के लिए अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के मकसद से सरकार ने ट्रैकिंग मार्गों में 145 कॉटेज बनाने का फैसला किया है। कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि बागेश्वर जिले में स्थित पिंडारी और कफनी ग्लेशियर जाने वाले ट्रैकिंग रूटों में 45 कॉटेज बनाए जाएंगे।
जबकि पिथौरागढ़ जिले की चौंदास, दारमा और व्यांस घाटी और मुनस्यारी के निकट के ग्लेशियर रूटों में 100 कॉटेजों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। कॉटेजों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है और अगले साल तक यह बनकर तैयार हो जाएंगे।
कुमाऊं के ट्रैकिंग रूटों पर पर्यटकों और अन्य यात्रियों के ठहरने की अच्छी व्यवस्था हो जाने के बाद पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है। जो पर्यटक हवाई मार्ग से छोटा कैलास आदि के दर्शन करना चाहेंगे उनके लिए निगम ने हेलीकॉप्टर से यात्रा कराने का भी प्रबंध कर लिया है। इससे निगम को पर्यटन से होने वाली आय काफी बढ़ जाएगी।
- धीराज सिंह गर्ब्याल, एमडी केएमवीएन